-.बलरामपुर में मनरेगा मजदूरों के 1.22 करोड़ से अधिक का हैं बकाया बलरामपुर विभागीय लापरवाही व लेट लतीफी के कारण मनरेगा योजना में कार्यरत सैकड़ों मजदूरों को पिछले नवंबर माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है. मनरेगा मजदूरों को इन दिनों एक-एक पैसे के लिए मोहताज होना पड़ रहा है. मनरेगा की मजदूरी पर आश्रित परिवार विभाग के इस देरी से काफी परेशानी में हैं. वर्तमान में बलरामपुर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अन्य निजी व सरकारी योजना मिलाकर करीब छह सौ इक्कीस योजनाएं मनरेगा की संचालित हैं. उसमें से महत्वपूर्ण योजना जल जीवन हरियाली के तहत पोखर का निर्माण, सड़क में मिट्टी भराई कार्य, पौधारोपण, खेल मैदान निर्माण आदि शामिल है. मनरेगा मजदूरों को 245 रुपये के हिसाब से मजदूरी का भुगतान होता है. बलरामपुर प्रखंड में दिसंबर के अंतिम सप्ताह से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. प्रखंड के एक करोड़, बाईस लाख, सतहत्तर हज़ार, चौवालीस रुपए मजदूरी मजदूरों का बकाया है. इधर मजदूरी नहीं मिलने से मनरेगा के कार्य पर भी काफी असर पड़ा है. शरीफनगर पंचायत मनरेगा सचिव गुरुदेव मुनि ने बताया कि मनरेगा भूमिहीन और बेरोज़गार ग्रामीणों को आजीविका देती है. उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करती है. चूंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर काम मिलता है. इसलिए मनरेगा की बहुत मांग है. सरकार का लक्ष्य मनरेगा के तहत अधिक परियोजनाएं लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजित करना है. ग़रीब जॉब कार्ड धारकों के लिए, तालाबों की खुदाई, कार्य और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन हरियाली मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे मैनुएल वर्क आजीविका प्रदान करते हैं. लंबित धनराशि जारी करने और बिहार के लिए मनरेगा बजट को कम करने में केंद्र सरकार की देरी से चल रहे कार्यों को पूरा करने में बाधा आ रही है. कहते हैं पदाधिकारी प्रखंड मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी अजय कुमार कहना है कि एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) जनरेट कर दिया गया है. जैसे ही केंद्र सरकार से राशि जारी होगी. भुगतान मजदूरों के खातों में खुद ही ट्रांसफर हो जायेगा. उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गयी है.
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