अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी अलविदा की नमाज अमन व शांति के लिए आखरी जुमा को लोगो ने मांगी दुआ

अकीदत के साथ रोजेदारों ने पढ़ी अलविदा की नमाजअमन व शांति के लिए आखरी जुमा को लोगो ने मांगी दुआ

फलका. पाक व बरकतों का महीना रमजानुल मुबारक के आखरी जुमा अलविदा की नमाज प्रखंड की विभिन्न मस्जिदों में रोजेदारों ने अकीदत के साथ अदा की रमजानुल मोबारक के आखरी जुमा में नमाजियों की काफी भीड़ देखी गयी. रोजेदारों ने आखरी जुमा को नम आंखों से अलविदा दी. लोगो ने रो रो कर दुनिया में अमन व शांति भाईचारी के लिए दुआ मांगी. फलका के नहरी मस्जिद के इमाम मौलाना शब्बीर अहमद कासमी ने नमाज से पूर्व अपनी तकरीर में पाक माह रमजान की फजीलत पर रौशनी डालते हुए कहा कि रमजान-ऊल-मुबारक तमाम महीनों सेअफजल है. ऐसे तो इस्लाम धर्म में हर माह की अलग-अलग फजीलत है, लेकिन माह-ए-रमजान की अहमियत ज्यादा है. अलविदा के दिन नमाजी नहा धो कर साफ कपड़े पहन कर इत्र लगा कर मस्जिद जाते है. ईद से पहले लोगो को फितरा निकलना चाहिये फितरा निकाल कर गरीबो यतीमो मिश्कीनो के बीच बांट देना चाहिये. फितरा घर के हर व्यक्ति के लिये निकलना चाहिये. जो बच्चा ईद से एक दिन पहले पैदा हुआ है उनका भी फितरा निकलना वाजिब है. फितरा निकालना उस व्यक्ति पर वाजिब है जिसके पास साढ़े 52 तौला चांदी या सात भर सोना है या उनके बराबर उन्हें हैसियत है. फितरा हर एक व्यक्ति पर 30 रुपया निकालना है या 30 रुपया के बदले अनाज दाम लगा कर निकलना है. फितरा निकालने का मकसद है जो यतीम ईद में कपड़ा नही बनाये वह नया कपड़ा बना ले.फलका बाजार जामा मस्जिद सहित बस्ती जामा मस्जिद सालेहपुर, नहरी मस्जिद महेशपुर, पीरमोकाम, पोठिया सहित प्रखंड की अन्य मस्जिदों में माह-ए-रमजान के अलविदा की नमाज अदा की गयी. बाजारों में जगह-जगह सेवई, रंग-बिरंगे कपड़े,इत्र, रुमाल, टोपी आदि की दुकानें सज गई हैं. ईद को लेकर बड़े-बूढ़े सहित खाशकर यूवा और बच्चे वर्ग अति उत्साहित नजर आ रहे हैं. छोटे-छोटे नन्हे बच्चे भी आखरी जुमा का रोजा रखा.

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By RAJKISHOR K

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