कटिहार के फलका से अली अहमद की रिपोर्ट
Weather: कटिहार जिले के फलका प्रखंड सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक और जानलेवा बना हुआ है. जून महीने की शुरुआत होते ही सूर्यदेव के तीखे तेवरों ने लोगों को भीषण रूप से झुलसाना शुरू कर दिया है. दिन चढ़ने के साथ ही पारे (तापमान) में हो रही रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी के कारण आम नागरिकों का घरों से बाहर निकलना पूरी तरह दूभर हो गया है. चिलचिलाती धूप और लू (हीटवेव) के कारण फलका की मुख्य सड़कें दोपहर होते ही सुनसान हो जा रही हैं और स्थानीय बाजारों का कारोबार भी इस तपिश की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
दोपहर 12 से 4 बजे तक घरों में कैद रहने की प्रशासनिक अपील
बढ़ते तापमान के कारण उत्पन्न हुए संकट और प्रशासनिक गाइडलाइन का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देखा जा सकता है:
- घोषित ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति: फलका और आसपास के चौराहों पर दोपहर के समय मानो जिंदगी ठहर सी जाती है. भीषण लू को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है. अधिकारियों ने आम लोगों से विशेष अपील की है कि वे दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच बहुत जरूरी न हो, तो सीधे धूप में निकलने का जोखिम कतई न उठाएं.
- स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर आफत: यह झुलसाने वाला मौसम मासूम बच्चों और कम्युनिटी के बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहा है. सुबह की पाली में स्कूल से घर लौटते समय छोटे-छोटे बच्चे पसीने से तर-बतर और बेहाल नजर आते हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने का ग्राफ बढ़ गया है.
फलका पीएचसी में बढ़े डिहाइड्रेशन के मरीज, बिजली कटौती ने बढ़ाई आफत
अस्पतालों का हाल: लगातार बढ़ रही इस तपन का सीधा असर जन-स्वास्थ्य पर दिखने लगा है. फलका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और स्थानीय निजी क्लीनिकों में इन दिनों उल्टी, दस्त, चक्कर आना, तेज बुखार, डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों की तादाद में अचानक भारी उछाल आया है. डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन को चौबीसों घंटे ओआरएस (ORS) और जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक दुरुस्त रखने का निर्देश दिया है.
ओवरलोडिंग से बिजली के ट्रांसफार्मर दे रहे जवाब, पंखे-एसी हुए फेल
बिजली का संकट:
गर्मी से तत्कालिक निजात पाने के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एयर कंडीशनर (AC), भारी क्षमता वाले कूलर और पंखों का इस्तेमाल रात-दिन किया जा रहा है. इसके कारण ग्रिड पर बिजली की खपत (लोड) अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है. परिणाम यह है कि ओवरलोडिंग की वजह से कई गांवों के ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं और अघोषित बिजली कटौती (लोकल फॉल्ट) की समस्या विकराल हो गई है. बिजली कटते ही बंद कमरों के भीतर लोग उमस से छटपटाने लगते हैं.
इस विकट स्थिति के बीच अब फलका के किसानों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की निगाहें केवल और केवल मानसून की पहली मानसूनी बारिश (Pre-Monsoon Showers) पर टिकी हैं. लोगों का मानना है कि जब तक इंद्रदेव की कृपा नहीं होगी, तब तक इस जानलेवा और दमघोंटू गर्मी से राहत पाना नामुमकिन है.
