टूटे पुल से आठ वर्षों से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण

टूटे पुल से आठ वर्षों से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे ग्रामीण

– प्रदर्शन कर ग्रामीणों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जताया आक्रोश बारसोई बारसोई प्रखंड अंतर्गत कचना रेलवे स्टेशन के समीप वार्ड संख्या 12 बहानगर में वर्ष 2017 की विनाशकारी बाढ़ में टूटा पुल आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. आठ वर्षों से पुल निर्माण नहीं होने के कारण हजारों ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है. गुरुवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने टूटे पुल के समीप जोरदार प्रदर्शन कर प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अविलंब पुल निर्माण की मांग उठाई. ग्रामीणों ने कहा कि बटना, छतना, घोड़ाडीहा, बसल गांव होते हुए बिलासपुर पश्चिम बंगाल की मुख्य सड़क तक पहुंचने का यह प्रमुख मार्ग है. पुल टूट जाने के कारण लोगों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और मजदूरों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. विघोर पंचायत मुखिया प्रतिनिधि मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार डीएम, संबंधित विभागीय अधिकारियों, सांसद एवं विधायक से मुलाकात कर मांग की जा चुकी है. लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय लोकसभा और विधानसभा के प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे कर ग्रामीणों से वोट मांगते हैं. लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्याओं को पूरी तरह भूल जाते हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जायेगा. लोगों ने प्रशासन से अविलंब स्थल निरीक्षण कर पुल निर्माण की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की है. प्रदर्शन करने वाले में अमन कुमार महतो, उत्तम राय, गीता देवी, राहुल ठाकुर, एमडी दारा, रजीबुल, रामू किस्कू, अनिल पुरी, डोमा ऋषि, नरेश राय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहें.

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Author: RAJKISHOR K

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