फोटो 22 कैप्शन- घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग प्रतिनिधि, कटिहार पुलिस से प्रताड़ित होकर आत्महत्या करने वाले प्रकाश एक अच्छे स्वभाव का युवक था. प्रकाश ऑफिसर्स कॉलोनी वार्ड नंबर आठ का रहने वाला था. उसके पिता स्व जाबुन रविदास के नाम पर जन वितरण प्रणाली केंद्र है. लेकिन उनके पिता की मौत के बाद वह बंद हो गया. जन वितरण प्रणाली केंद्र इसकी उसी जमीन पर संचालित थी. जहां उसने आत्महत्या किया. सिरसा स्थित उस जमीन पर उसके पिता ने दो कमरे बनवाये थे. जिससे जन वितरण केंद्र भी संचालित होता था. उसके परिवार के एक सदस्य यहां आकर रहा भी करता था. जमीन पर सिपाही करना चाहता था जबरन कब्जा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रकाश के पिता के वहां और भी जमीन थी. जिसमें कुछ जमीन को उसने बिक्री भी किया. जिसकी जानकारी उसके घर के सभी सदस्यों को है. लेकिन जिस जमीन पर सिपाही प्रमोद रजक ने उसके पिता के मरणोपरांत दावा किया. उसकी जानकारी परिवार की किसी सदस्यों को नहीं है. परिजनों का आरोप है कि कागजात ही फर्जी है. कानूनी दांव पेंच के साथ-साथ उसे महकमें एवं प्रशासनिक विभाग का भी सहयोग मिलता है. यही वजह रही कि प्रकाश के पिता की मौत के बाद अचानक सिपाही ने उसकी जमीन पर दावेदारी करते हए जबरन कब्जा करना चाहा. प्रकाश का कहना था कि जब पिताजी जीवित थे तो उसने कभी उसे जमीन पर दावा नहीं किया, लेकिन उसके मरणोपरांत वह उस जमीन पर दावेदारी करने पहुंच गये. जिसे लेकर दोनों के बीच मामला बढ़ा, दोनों ने उक्त जमीन पर अपनी दावेदारी की. जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन था. सिस्टम से मानी हार, कर ली आत्महत्या जब सैंया भाई कोतवाल तो डर काहे का. यही हाल सिपाही प्रमोद रजक की है. आरोप है कि विवादित जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने के बावजूद, वह प्रकाश को परेशान करता था. सिस्टम सिपाही के साथ था, जिस कारण प्रकाश को अपनी लड़ाई लड़ने में काफी परेशानी हो रही थी. साथ ही सिपाही ने उसे इस कदर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था. अंततः उसने आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठा लिया. हालांकि इस मामले में घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट एवं मोबाइल रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए आरोपित सिपाही को कस्टडी लेकर अग्रतर कार्रवाई में जुट गयी है.
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