रासायनिक उर्वरक के प्रयोग संतुलन से मजबूत होती है मिट्टी की उर्वरा शक्ति

रासायनिक उर्वरक के प्रयोग संतुलन से मजबूत होती है मिट्टी की उर्वरा शक्ति

– संयुक्त कृषि भवन कटिहार के सभागार में उर्वरक के संतुलित उपयोग के लिए चलाया जागरूकता अभियान कटिहार संयुक्त कृषि भवन कटिहार के सभागार में उर्वरक के संतुलित उपयोग के लिए जागरूकता अभियान सह जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया गया. जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने दीप जलाकर उदघाटन किया. उप परियोजना निदेशक आत्मा के वैज्ञानिक, सहायक निदेशक रसायन, सभी प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सभी सहायक तकनीकी प्रबंधक व सभी प्रखंडों के 115 कृषकों ने भाग लिया. जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को कम कर जैविक उर्वरक को बढ़ावा देना है. रसायनिक उर्वरक के प्रयोग को संतुलन में लाया जा सके. किसानों को मिट्टी जांच कर ही उर्वरक का प्रयोग करने को लेकर अनुरोध किया. खेतों में मूंग व ढैचा को हरित खाद के रूप में प्रयोग करने की जानकारी दी. खेतों में प्राकृतिक रूप से नत्रोजन स्थिरीकरण हो सके. मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे. उर्वरक के संतुलित उपयोग के लिए किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी का उपयोग करने पर बल दिया. पौधे की सीधे पत्तियों के माध्यम से पोषक तत्व मिल सके और मिट्टी प्रदूषित नहीं हो. कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने उर्वरक के संतुलित उपयोग करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया. कैसे फसलों में उर्वरक की मात्रा का निर्धारित किया जाय. साथ ही कम रसायनिक उर्वरक का प्रयोग कर अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके. साथ ही फसल चक्र अपनाने को भी बताया गया.

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Published by: Rajkishor k

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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