बलिया बेलौन इबादत का महीना रमजानुल मुबारक का पहला जुमा की नमाज में बुढे, बच्चे, जवान सभी शरीक हुए. मदरसा गरीब नवाज शेखपुरा कदवा के प्रधान मौलवी मारूफ अली ने कहा की रमजानुल मुबारक का पहला जुमा अकीदत के साथ अदा की गयी. यह बरकत वाला महीना है. रोजा के बदले अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों को दोजख की आग से हिफाजत फरमाते हैं. इसलिए सभी लोगों को एक माह का रोजा पाबंदी से रखने की गुजारिश करते हुए कहा की जिस ने भी बिना किसी वजह के रमजान का रोजा छोड़ता है तो उस पर अजाब नाजिल होता है. लोगों को एक भी रोजा नहीं छोड़नी चाहिए. रोजेदार को जन्नत नसीब होगी. रोजा रखने से इमान ताजा होता है. रोजेदार का गुनाह माफ कर दिया जाता है. उनकी मगफिरत होती है. रोजा रखने से सेहत भी अच्छा रहता है. परहेजगारी पैदा होती है. उन्होंने कहा की बच्चों को रोजा और नमाज के लिए कहना चाहिए. बच्चे जब सात साल का हो जाये तो उसे नमाज और रोजा की ताकीद करनी चाहिए. 11 साल की उम्र में नमाज व रोजा के लिए सख्ती करनी चाहिए. 14 साल के उम्र में उस पर रोजा और नमाज फर्ज हो जाता है. रोजे की फजीलत बताते हुए कहा की रोजा इनसान को तक्वा और परहेज़गार बनाता है. रोजा रखने वालों पर अल्लाह पाक की रहमत बरसती है. लोगों को चाहिए की रमजानुल मुबारक का तीसों रोजा रख कर अल्लाह रब्बुल इज्जत की खुब इबादत करें. इस माह की इबादत का शवाब कई गुणा बढ़ा दी जाती है.
बूढ़े, बच्चे व युवाओं ने अदा की नमाज
बूढ़े, बच्चे व युवाओं ने अदा की नमाज
