– पीली व काली सरसों की अच्छी पैदावार, बाजार में बेहतर दाम की उम्मीद कोढ़ा प्रखंड के किसानों ने समय के साथ कदम मिलाते हुए खेती में आधुनिक यंत्रों को अपनाना शुरू कर दिया है. सरसों की खेती में अब पारंपरिक तरीकों की जगह मशीनों ने ले ली है. पहले जहां सरसों की कटाई के बाद बैलों या मजदूरों के माध्यम से धोनी कर दाने अलग किए जाते थे. अब किसान मशीनों की मदद से कम समय और कम लागत में फसल तैयार कर रहे हैं. किसानों ने कहा, इस वर्ष सरसों की फसल काफी अच्छी हुई है. आधुनिक मशीनों के उपयोग से न केवल श्रम की बचत हुई है. फसल की गुणवत्ता भी बेहतर बनी है. कटाई और दाने निकालने की प्रक्रिया तेज होने से किसानों को समय पर अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा हो रही है. सरसों मुख्यतः दो प्रकार की होती है.पीली और काली. पीली सरसों में तेल की मात्रा अधिक होती है. जबकि काली सरसों का उपयोग तेल के साथ-साथ मसाले के रूप में भी किया जाता है. दोनों किस्मों की पैदावार संतोषजनक रही है. जिससे किसानों में उत्साह है. सरसों की कटाई के बाद अब खेत खाली हो चुके हैं और किसान अगली फसल के रूप में मखाना की खेती की तैयारी में जुट गए हैं. किसानों को उम्मीद है कि इस बार बाजार में सरसों को अच्छी कीमत मिलेगी. जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी. बेहतर उत्पादन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से कोढ़ा प्रखंड के किसान आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं.
मशीनों से तैयार हो रही फसल, अब मखाना की खेती की तैयारी
मशीनों से तैयार हो रही फसल, अब मखाना की खेती की तैयारी
