– परीक्षा नियंत्रक बर्सर समेत कई दायित्वों का कर रहे निर्वहन – अधिकांश कॉलेजों में हालात एक समान कटिहार पूणिया विवि अंतर्गत पड़ने वाले अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकाें की भारी कमी है. कॉलेजों में एक शिक्षकों को कई विभाग का प्रभार देकर भले ही कार्य चलाया जा रहा है. लेकिन अधिकांश विषयों में शिक्षक नहीं होने और कई शिक्षकों को एक साथ कई प्रभार दिये जाने की वजह से पठन पाठन प्रभावित हो रहा है. छात्रों की शिकायत की कॉलेजों में उपस्थिति को लेकर बार- बार कई विभागों द्वारा फोन कर कॉलेज आने की बात कही जाती है. शिक्षकों की कमी व कई शिक्षक के अतिरिक्त प्रभार में बने रहने के कारण उनलोगों का समय पर पठन पाठन नहीं होने से कोचिंग के सहारे ही काेर्स पूरा करने की नौबत बनी रहती है. एनएसयूआई के छात्र नेता अमित पासवान, विशाल कुमार समेत अन्य का कहना है कि सबसे खस्ता हालत केबी झा कॉलेज की है. जहां एक ही शिक्षक को वर्सर, परीक्षा नियंत्रक व अंग्रेजी लैंग्वेज लैब का कोडिनेटर से लेकर एनएसएस समन्वयक, तो किसी को क्रीड़ा अध्यक्ष, हॉस्टल इंचार्ज तक की जिम्मेवारी दी गयी है. परीक्षा नियंत्रक व वर्सर का कार्य को लेकर दिन भर लगने रहने की जरूरत होती है. ऐसे में शिक्षक द्वारा किस परिस्थिति में वर्ग संचालन करते होंगे यह तो शिक्षक के ऊपर निर्भर है. एनएसयूआई के छात्र नेता अमित पासवान का कहना है कि राजभवन से कई बार पत्र जारी किया गया है कि शिक्षकों को पठन पाठन को देखते हुए अतिरिक्त कार्य के लिए प्रभार नहीं दिया जाये. लेकिन अधिकांश महाविद्यालयों में शिक्षकों का अभाव कहें या फिर कॉलेज प्रशासन की मनमानी एक नहीं तीन तीन अतिरिक्त प्रभार देकर कॉलेज संचालन करने को मजबूरी बनी हुई है. उनलोगों ने कॉलेज प्रशासन से लेकर विवि प्रशासन से शिक्षकों से केवल पठन पाठन कार्य के लिए भार देने की मांग की है. ताकि छात्र छात्राओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पडे. धीरे धीरे शिक्षकों की पूरी की जा रही कमी पीयू कुलसचिव डॉ अनन्त प्रसाद गुप्ता का कहना है कि पूर्व के वनिस्पत अब कॉलेजाें में शिक्षकों की कमी दूर हो रही है. बीपीएससी से बहाल हो रहे शिक्षकों की प्रतिनियुक्त महाविद्यालयों में की जा रही है. कॉलेज संचालन व वर्गसंचालन जरूरी है. दोनों के हित को ध्यान में रखते हुए कॉलेज प्रशासन को चाहिए कि तत्पर होकर कार्य निकालें. कुछ दिन की बात है. सभी महाविद्यालयाें में शिक्षकों के प्रतिनियुक्ति के बाद इस तरह की समस्या दूर हो जायेगी.
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