कटिहार. सदर अस्पताल में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि जितनी दवाई मरीजों के लिए होनी चाहिए. उसमें सभी दवाई शत-प्रतिशत मरीजों को मिल पा रही है. ये दवाई है तो वो नहीं वो है तो ये नहीं, यह सिलसिला चलता ही रहता है. हाल में सदर अस्पताल में पहले की अपेक्षा दवाई की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन अभी भी मरीज को कई दवाई है जो बाहर से खरीदारी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. वर्तमान समय में अभी अस्पताल में 159 किस्म की दवाई उपलब्ध है. जो पहले की अपेक्षा में काफी ज्यादा है. अभी सबसे बड़ी परेशानी सुगर के मरीजों को उठानी पड़ रही है. सुगर मरीजों को सारी किस्म की दवाई अस्पताल में नहीं मिल रही है. इसके अलावा मल्टीविटामिन की दवाई भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. बी कंपलेक्स जो मल्टीविटामिन है. मरीज को बाहर से खरीदारी करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल में इन दिनों 650 से 700 के आसपास मरीज अपना इलाज कराने के लिए रोजाना पहुंच रहे हैं. ऐसे में सदर अस्पताल में शत-प्रतिशत था पूरी दवाई नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है. साथ ही गरीब मरीज पैसे के अभाव में बाहर से दवाई तक नहीं खरीदारी कर पा रहे हैं. शनिवार को कुरेठा से पहुंचे रानी देवी ने बताया कि चिकित्सक ने चार किस्म की दवाई लिखी. जिसमें की तीन किस्म की दवाई मिल पाई है. लेकिन एक किस्म की दवाई बाजार से खरीदारी करने के लिए बोला गया है. उन्होंने बताया कि उनके पांव में सूजन है. इसको लेकर वह अस्पताल दिखाने के लिए आयी थी. शहर के फासिया से पहुंचे अनिल कुमार ने बताया कि उनके आंख में प्रॉब्लम है. कुछ दवाई तो सदर अस्पताल में मिली है. लेकिन एक दवाई जो महलम है वह बाहर से खरीदारी करने के लिए बोला गया है. इसके अलावा भी कई ऐसे मरीज थे. जिन्हें शत प्रतिशत दवाई नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर से ही दवाई खरीदने करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था. हवाई अड्डा के रहने वाले संदीप चौधरी ने बताया कि मुझे शुगर की बीमारी है. लेकिन सभी किस्म की दवाई अस्पताल में नही मिली. अस्पताल पहुंचे मीरा देवी, शोभा देवी, रंजीत पासवान ने कहा कि सदर अस्पताल गरीब मरीज अपना इलाज के लिए पहुंचते हैं. यदि यहां पर दवाई नहीं मिलेगी तो हम सभी गरीबों का इलाज कैसे हो पायेगा. बहरहाल सदर अस्पताल में दवाई की संख्या तो काफी बढ़ी है. लेकिन शत प्रतिशत दवाई के अभाव में मरीजों को कई दवाई अभी भी खरीदारी करने के लिए बाहर अपने पैसे लुटाने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
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