सनसनीखेज: डीएस कॉलेज में कार्य कर रहे बाहरी व्यक्ति ने माइग्रेशन फ्रॉम बेच जमा नहीं की राशि, हड़कंप

सनसनीखेज: डीएस कॉलेज में कार्य कर रहे बाहरी व्यक्ति ने माइग्रेशन फ्रॉम बेच जमा नहीं की राशि, हड़कंप

– आठ वॉल्यूम का चालीस हजार रुपये का कर्मी लगा रहे गबन का आरोप – सरकारी राशि को 72 घंटे के अंदर जमा कराने है प्रावधान – भंडारपाल व प्रधान सहायक द्वारा प्राचार्य को जानकारी देने के बाद मामला आया सामने – स्थाई कर्मी रहने पर बाहरी व्यक्ति से फॉर्म बिक्री कराने पर उठने लगे सवाल कटिहार डीएस कॉलेज में कार्य कर रहे बाहरी व्यक्ति द्वारा माइग्रेशन फॉर्म बेचकर राशि जमा नहीं करने का मामला प्रकाश में आया है. यह मामला भंडारपाल व प्रभारी प्रधान सहायक डीएस कॉलेज द्वारा प्राचार्य को सात अक्तूबर को जानकारी देने के बाद सामने आया है. कॉलेज कर्मचारियों व शिक्षकों में हड़कम्प मचा हुआ है. दोनों कर्मचारियों के प्राचार्य डीएस कॉलेज को जानकारी देने के चौबीस घंटे बीत जाने के बाद न तो उक्त के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी न ही उससे अन्य सामानों को जब्ती का निर्देश दिया. इतना ही नहीं अब तक विवि को इसकी सूचना नहीं दी गयी है. डीएस कॉलेज के भंडारपाल नीतीश भारद्वाज द्वारा सात अक्तूबर 25 को प्रभारी प्रधान सहायक को लिखित जानकारी दी गयी कि सज्जाद अंसारी द्वारा पूर्णिया विवि एवं बीएनएमयू का माइग्रेशन फॉर्म भंडारकोष से रिसिव कर प्राचार्य के निर्देश पर छात्रों के बीच बिक्री कर रहे थे. उनके भंडार का प्रभार ग्रहण के बाद पूर्व प्राचार्य के मौखिक निदेश पर उनके भंडार पंजी से वोल्यूम पीयू माइग्रेशन फॉर्म रिसिव किया. जिसकी राशि महाविद्यालय कोष में जमा हुई या नहीं इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. इसी बीच सज्जाद अंसारी कार्य छोड़कर कार्यालय से चले गये. अद्यतन अनुपस्थित है. माइग्रेशन फॉर्म क्रम संख्या 26201-300-100,11601-700-100, 11101-200-100, 11501-600-100,261-200-100,39901-4000-100,40901-4100-100,41801-900-100 कुल आठ सौ पीस माइग्रेशन फॉर्म संख्या संस्था की राशि महाविद्यालय के लेखाशाखा में जमा नही की गयी है. इसकी जानकारी प्राचार्य को लेखपाल द्वारा भी दी गयी है. जानकारों की माने तो माइग्रेशन फॉर्म बेचने के बाद प्रतिदिन राशि जमा करने का प्रावधान है. नियमत: 72 घंटे के अंदर हर हाल में बेचे गये माइग्रेशन फॉर्म की राशि जमा करने का प्रावधान है. लेकिन उक्त कर्मी के द्वारा कई महीनों के बाद भी सरकारी राशि का जमा नहीं किया जाना जांच का विषय है. नियमित कर्मी से माईग्रेशन फॉर्म बेचने को मांगा आदेश पूर्णिया विवि का माइग्रेशन फाॅर्म पूर्व प्रभारी प्रधान सहायक प्रदीप कुमार के समय से सज्जाद अंसारी द्वारा छात्रों को बेचा जाता रहा है. वर्तमान भंडारपाल व लेखपाल द्वारा दी गयी सूचना के अनुसार अभी तक उपलब्ध आंकड़ा से पता चलता है कि अब तक सज्जाद अंसारी द्वारा भंडार से प्राप्त कर बेचे गये लगभग आठ सौ माइग्रेशन फॉर्म की राशि चालीस हजार रूपये महाविद्यालय में जमा नहीं किया गया. इसे घोर वित्तीय अपराध बताया है. उन्होंने प्राचाार्य को लिखा है कि तत्काल उक्त राशि की वसूली के लिए वैधानिक प्रक्रिया आरम्भ की जाये. साथ ही तत्काल छात्रों की समस्या को ध्यान में रखते हुए तत्काल नियमित कर्मी द्वारा माईग्रेशन प्रपत्र बिक्री कराने के लिए प्रकाश सिंह को अधिकृत करने को आदेशत मांगा है. ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृति नहीं हो. संज्ञान में मामला आने पर स्थायी कर्मचारी को किया गया डिपुट वे कुछ दिन पूर्व डीएस कॉलेज में प्राचार्य का प्रभार लिये हैं. उनके सामने यह मामला आने पर उक्त व्यक्ति को इस कार्य को करने से मना कर दिया गया है. आठ व्योलूम से चालीस हजार रूपये महाविद्यालय के लेखाशाखा में जमा नहीं करने की जानकारी मिली है. उसे जमा करने को कहा गया है. साथ ही उसके द्वारा पूर्व में कितने माइग्रेशन फॉर्म बेचने के बाद राशि जमा नहीं की गयी है. इसका भी हिसाब किताब मांगा जा रहा है. विवि को इससे अवगत कराया जायेगा. साथ ही स्थायी चतुर्थवर्गीय कर्मचारी प्रकाश कुमार सिंह को उक्त कार्य के लिए अधिकृत कर दिया गया है. प्रशांत कुमार, प्राचार्य ,डीएस कॉलेज, कटिहार

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By RAJKISHOR K

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