कुरसेला में NH-31 किनारे सज रहीं 'मौत की दुकानें': 4 लेन निर्माण से मंडराया रोजी-रोटी का संकट

कटिहार जिले में NH-31 की व्यस्त सड़क के किनारे लगीं खाने-पीने की दुकानें मौत को दावत दे रही हैं. 4 लेन निर्माण से इन दुकानों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे सैकड़ों गरीब परिवारों की आजीविका पर संकट आ गया है.

कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड अंतर्गत नया चौक पर इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और डरावना नजारा देखने को मिल रहा है. राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (NH-31) की बेहद व्यस्त सड़क के बिल्कुल किनारे भुजा, पकोड़ी, चाट और लिट्टी बेचने वालों की फुटकर दुकानें सजी हुई हैं. सड़क के ठीक मुहाने पर चल रही इन दुकानों के बीच यदि कोई तेज रफ्तार अनियंत्रित वाहन गलती से भी घुस जाए, तो एक भयावह सामूहिक दुर्घटना हो सकती है. इसके बावजूद अपनी दैनिक रोजी-रोटी की फिक्र में डूबे इन गरीब दुकानदारों के पास यहां बैठने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

महिलाओं के हाथों में कमान, सैकड़ों परिवारों का होता है भरण-पोषण

कुरसेला बाजार के नया चौक सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर यह नजारा किसी एक दुकान का नहीं है. इस जानलेवा अतिक्रमण के पीछे की सामाजिक मजबूरी भी बेहद गहरी है:

  • रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया: सड़क किनारे लगने वाले इन छोटे-मोटे ठेलों और दुकानों से इस क्षेत्र के सैकड़ों गरीब परिवारों की दैनिक आजीविका चलती है.
  • महिला उद्यमिता व बेरोजगारी: ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी के बीच इन नाश्ते की दुकानों को चलाने में सबसे बड़ी आबादी स्थानीय महिलाओं की है, जो इस खतरनाक कारोबार से अपने बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं.
  • ग्राहकों की भारी पसंद: हाईवे से गुजरने वाले राहगीर और स्थानीय लोग भी इन दुकानों पर मिलने वाले पारंपरिक लजीज नाश्ते को बड़े चाव से खाते हैं, जिसके चलते सुरक्षा जोखिमों के बावजूद यहां सुबह से शाम तक ग्राहकों की भारी भीड़ जुटी रहती है.

अतिक्रमण हटाओ अभियान बेअसर, फोरलेन निर्माण से बढ़ेगी फजीहत

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जब भी अनुमंडल या अंचल प्रशासन द्वारा हाईवे को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया जाता है, तो ये दुकानदार कुछ दिनों के लिए हट जाते हैं. लेकिन पेट की भूख के कारण महज 3-4 दिनों के भीतर स्थितियां दोबारा जस की तस हो जाती हैं.

बेरोजगारी की नई तलवार:

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (NH-31) को फोरलेन (4-Lane) में तब्दील करने की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया काफी तेज हो गई है. ऐसे में हाईवे चौड़ीकरण के दौरान इन सभी फुटकर दुकानदारों को इस जगह को हमेशा के लिए छोड़ना पड़ेगा. यदि प्रशासन द्वारा समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हाईवे सुरक्षा के साथ-साथ सैकड़ों परिवारों के अचानक सड़क पर आ जाने और बेरोजगार होने का एक नया सामाजिक संकट खड़ा हो जाएगा.

वैकल्पिक 'वेंडिंग जोन' बनाने की उठी मांग

दुकानदारों के साथ-साथ हर पल जोखिम में रहने वाले ग्राहकों की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रबुद्ध समाज ने जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से एक विशेष मांग की है. लोगों का कहना है कि केवल पुलिसिया बल पर इन्हें उजाड़ना समस्या का समाधान नहीं है. प्रशासन को चाहिए कि सड़क सुरक्षा के मानकों का पालन करते हुए बाजार क्षेत्र से थोड़ा हटकर इन फुटकर दुकानदारों के लिए एक व्यवस्थित 'वेंडिंग जोन' (वैकल्पिक बाजार स्थल) का निर्माण कराए, ताकि राहगीर भी सुरक्षित रहें और गरीबों के चूल्हे भी जलते रहें.


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लेखक के बारे में

अजीत ठाकुर प्रिंट माध्यम में 28 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. कुरसेला (कटिहार) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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