रमजान सब्र, इबादत व नेकी का पैगाम: मौलाना

रमजान सब्र, इबादत व नेकी का पैगाम: मौलाना

कोढ़ा माह-ए-रमजान की बरकतों के बीच लोगों को दीन व इंसानियत का पैगाम देते हुए मौलाना बिलाल ने कहा कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, परहेजगारी व इबादत का मुकम्मल पैग़ाम है. कहा कि इंसान के जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है. आंख, कान, नाक, मुंह, हाथ और पैर सभी को गुनाह से बचाकर रखना ही असल रोज़े की रूह है. मौलाना ने कहा कि जो शख्स इस मुबारक महीने को गफलत में गुजार देता है. बदनसीब कोई नहीं हो सकता. वह शख्स बेहद खुशनसीब है जो अल्लाह के खौफ और उसकी रज़ा के लिए रोज़ा रखता है. इबादत में मशगूल रहता है. उन्होंने कहा कि तमाम मुसलमानों के लिए रमजान का महीना बेहद ख़ास होता है. इस दौरान ज़्यादा से ज़्यादा नेकी और भलाई के काम करने चाहिए.

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By Rajkishor k

राजकिशोर प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के कटिहार कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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