KATIHAR : बेमौसम बारिश बनी किसानों के लिए आफत, मक्का-मिर्च उत्पादक परेशान
मई महीने में हो रही झमाझम बारिश अब किसानों के लिए राहत नहीं, मुसीबत बन गई है.
कटिहार से सरोज कुमार की रिपोर्ट :
मई महीने में हो रही झमाझम बारिश अब किसानों के लिए राहत नहीं, मुसीबत बन गई है. आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादलों को देखकर ही मक्का और मिर्च की खेती करने वाले किसानों की धड़कनें बढ़ जा रही हैं. बुधवार अहले सुबह हुई तेज बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.
खेतों में भरा पानी, फसल बर्बादी का खतरा
किसान रविशंकर चौधरी, हरिशंकर चौधरी, संजय चौधरी और मुकेश सदा समेत कई किसानों का कहना है कि अब अगर और बारिश हुई तो वे बर्बाद हो जाएंगे. खेतों में लगी मक्का की फसल तैयार है, लेकिन लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया है. पानी नहीं निकला तो मक्का की बालियां खेत में ही सड़ जाएंगी. वहीं मिर्च की फसल के लिए भी यह बारिश जहर बन रही है. खेतों में पानी भरने से मिर्च के पौधे गलने लगे हैं. किसान अब खेतों से पानी निकालने की जद्दोजहद में लगे हैं, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है.
कर्ज लेकर की थी खेती, डूबने का डर
किसानों ने बताया कि आलू की फसल निकालने के बाद सेठ-साहूकारों और पूंजीपतियों से कर्ज लेकर मक्का और मिर्च की खेती की थी. फसल अच्छी हुई थी और उम्मीद थी कि इस बार कर्ज उतर जाएगा. लेकिन बेमौसम बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. सुबह आठ बजे के बाद से ही जब बादल घिरने लगते हैं तो कलेजा मुंह को आ जाता है. किसान संजय चौधरी ने कहा कि अगर एक-दो दिन और बारिश हो गई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे. न कर्ज चुका पाएंगे, न घर चला पाएंगे.
सूखने की जगह सड़ने की नौबत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मई में इतनी बारिश मक्का और मिर्च के लिए नुकसानदायक है. इस समय फसल को धूप की जरूरत होती है ताकि दाने में नमी कम हो और मिर्च में रंग-तीखापन आए. लेकिन बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ गई है. मक्का की बालियां सूखने की जगह सड़ने की कगार पर हैं. फिलहाल किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं और मौसम साफ होने की दुआ कर रहे हैं.