पूर्णिया विश्वविद्यालय अंतर्गत कटिहार स्थित डीएस कॉलेज में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित 'विश्वविद्यालय अधिनियम 2026' के खिलाफ शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी एकजुट हो गए हैं. उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता पर प्रहार, प्रशासनिक एवं वित्तीय नियंत्रण सरकार द्वारा अपने हाथों में लेने के प्रयास के विरोध में राज्यस्तरीय चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है. इस संबंध में पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रक्षेत्रीय उपाध्यक्ष सह डीएस कॉलेज कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष शंभू कुमार यादव ने विस्तृत जानकारी दी.
"राधाकृष्णन आयोग के सिद्धांतों के खिलाफ है प्रस्तावित कानून" — शंभू कुमार यादव
शंभू कुमार यादव ने वर्ष 1949 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित 'यूनिवर्सिटी एजुकेशन कमीशन' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा:
- तानाशाही व्यवस्था का खतरा: आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि उच्च शिक्षा पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण तानाशाही शासन व्यवस्था को बढ़ावा देता है.
- विचारों की स्वतंत्रता जरूरी: बौद्धिक प्रगति, स्वतंत्र अनुसंधान और विवादास्पद विषयों पर निष्पक्ष विचार व्यक्त करने के लिए विश्वविद्यालयों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए. राज्य का दायित्व आर्थिक सहायता देना है, न कि शैक्षणिक नीतियों पर कब्जा करना.
'विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक व कर्मचारी संघर्ष मोर्चा' का आंदोलन कार्यक्रम
'विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं कर्मचारी संघर्ष मोर्चा, बिहार' के पटना संयुक्त निदेषन में घोषित चरणबद्ध आंदोलन की तिथियां इस प्रकार हैं:
- 5 से 8 अगस्त: सभी विश्वविद्यालयों, स्नातकोत्तर विभागों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी विरोध स्वरूप काला बिल्ला लगाकर अपना कार्य निष्पादित करेंगे.
- 10 अगस्त: सभी शिक्षक व कर्मचारी मास सीएल (Mass CL) लेकर विश्वविद्यालय मुख्यालय पर रोषपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और कुलपति को ज्ञापन सौंपेंगे.
- 11 से 15 अगस्त: प्रत्येक कार्य दिवस को अपराह्न 1:30 बजे से 2:00 बजे (30 मिनट) तक कार्यस्थल पर नारेबाजी व विरोध प्रदर्शन करेंगे.
- 5 सितंबर (शिक्षक दिवस): प्रस्तावित विधेयक के दुष्प्रभावों को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ सीधा संवाद (Interaction) आयोजित किया जाएगा.
एकजुटता की अपील
मोर्चा के राज्यस्तरीय पदाधिकारियों (प्रो. डॉ. संजय कुमार सिंह) के निर्देशानुसार चारों संगठनों के प्रतिनिधि समन्वय बनाकर संघर्ष को सफल बनाएंगे. इसके लिए सभी प्रधानाचार्यों एवं विभागाध्यक्षों से भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का अनुरोध किया गया है.
