प्रतिनिधि, कोढ़ा रमजान का पाक महीना शुरू होते ही धार्मिक माहौल बन गया है. गेड़ाबाड़ी बाजार स्थित मस्जिद में विशेष तैयारियां की गई हैं. मस्जिद के मौलाना ने रमजान की फजीलत (महत्ता) बताते हुए कहा कि यह महीना इबादत, संयम और आत्मशुद्धि का है. उन्होंने बताया कि रोजा जहन्नुम की आग से बचाने वाली ढाल की तरह है. हर बालिग मुसलमान पर इसे रखना फर्ज है. मौलाना ने बताया कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि यह अपने नफ्स इच्छाओं पर काबू पाने की सीख देता है. रमजान में किया हर नेक काम 70 गुना अधिक सवाब देता है. रोजेदार दिनभर बिना कुछ खाए-पिए खुदा की इबादत में लगे रहते हैं. हदीस शरीफ में आया है कि जो व्यक्ति अल्लाह के लिए सच्चे दिल से रोजा रखता है. उसकी दुआ कबूल होती है और अल्लाह उसे जन्नत अता करता है. रमजान को लेकर उत्साह रमजान के मौके पर पूरे इलाके में भक्तिमय माहौल देखा जा रहा है. छोटे-छोटे बच्चे भी बड़े लोगों की तरह रोजा रख रहे हैं. नमाज अदा कर रहे हैं. इफ्तार के समय मस्जिदों और घरों में रौनक देखने को मिल रही है. लोग खजूर, शरबत, फल और पकवानों के साथ इफ्तार कर रहे हैं. तरावीह की नमाज अदा करने मस्जिदों में उमड़ रहे हैं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
