– घटना के बाद ही कुंभकर्णय नींद से जागती है प्रशासन कटिहार कुरसेला थाना क्षेत्र में सोमवार की देर रात बराती जा रहे एक स्कॉर्पियो सड़क पर रखें मक्के के कारण अनियंत्रित हो गयी थी. सड़क पर खड़ी मक्का लदा ट्रैक्टर से जा टकरायी. दुर्घटना इतनी जोरदार थी कि घटनास्थल पर ही आठ लोगों की मौत हो गयी. जबकि दो लोग घायल है. मामले के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद अब तक मामले में जिम्मेदारी तय नहीं की गयी है न ही कोई कार्रवाई हुई है. हालांकि इस घटना के बाद कुंभकर्णी प्रशासन की नींद टूटी तथा प्रशासनिक अमला के साथ लोगों को वार्निंग देने निकल गयी. मंगलवार को परिवहन पदाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद सड़क पर अतिक्रमण कर फसल मक्का आदि सुखा रहे लोगों को माइकिंग कर सख्त चेतावनी दे रहे थे. इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति सड़क अतिक्रमण करता है या फिर फसल सूखाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. अब लोग सवाल उठा रहे है कि आखिर किसान व स्थानीय लोग सड़क पर फसल क्यों सूखाते हैं. अगर लोग यह काम करते आ रहे हैं तो फिर प्रशासन खामोश क्यों रहती है. क्या इसी प्रकार का दुर्घटना का इंतजार जिला प्रशासन एवं उसके नुमाइंदे करते हैं. घटना को लेकर एक-दो दिनों तक पुलिस प्रशासन उन मामलों पर हस्तक्षेप करती है. उसके बाद पुनः मामला शिथिल हो जाती है. आवश्यक है कि ऐसे मामलों में जिला पुलिस प्रशासन सख्ती से कार्य ले तथा सड़क अतिक्रमण करने वालों या सड़क पर अनाज व सुखाने वालों पर विधि संवत कार्रवाई की जाये. अगर यह कार्रवाई दो दिन पहले होती तो आठ जानें बच जाती स्थानीय लोगों ने कहा कि डीटीओ आज जो पहल की है. अगर दो तीन दिन पूर्व किया जाता तो संभवत आठ जिंदगी बच जाती. आठ घरों के दीपक नहीं बुझते. स्थानीय लोगों ने कहा कि जब विभाग यूं ही दौड़ रही है और सारा कौरम पूरा हो रहा है तो अधिकारी सड़क पर क्या करेंगे. अधिकांश कार्य ऑफिस में बैठकर ही हो जाते हैं नहीं होने पर ही उस क्षेत्र का भ्रमण किया जाता है. ट्रैक्टर एग्रीकल्चर को लेकर मिलता है परमिट चलती है रोड पर जिले के अधिकांश ट्रैक्टरों की बात की जाय तो ट्रैक्टर का निबंधन कृषि कार्य के लिए किया जाता है. लेकिन यह ट्रैक्टर राष्ट्रीय राजमार्ग 31, राजमार्ग सहित अन्य मुख्यमार्ग पर धड़ल्ले से चलती है. ईट लोडिंग, बालू लोडिंग, गिट्टी लोडिंग सहित अन्य सामग्री की लोडिंग कर सड़कों पर फर्राते मारती हैं. यहां तक की उसके टेलर में बैक लाइट भी नहीं होती है. ऐसी स्थिति में रात्रि प्रहर में सड़कों पर आखिर किस प्रकार और किसके आदेश पर चलती है. इन मामलों में परिवहन विभाग क्या करती है.
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