कटिहार के बारसोई से रिपोर्ट,
आस्था, पर्यावरण व जनस्वास्थ्य से जुड़े महानंदा नदी तट को कुछ लोगों ने मानो कचरा फेंकने का अड्डा बना दिया है. बारसोई के मौलानापुर होकर गुजरने वाले स्टेट हाईवे-98 स्थित महानंदा नदी पुल के नीचे मुर्गा व्यवसायियों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को खुलेआम फेंका जा रहा है. लोगों का आरोप है कि कुछ नर्सिंग होम संचालक भी मेडिकल अपशिष्टों का निस्तारण नियमों के अनुसार करने के बजाय नदी किनारे फेंक रहे हैं. इसके कारण पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल गई है.लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. सोमवार को समस्या से त्रस्त स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा. ग्रामीणों ने नदी किनारे विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नदी में लगातार फेंके जा रहे अपशिष्ट पदार्थों के कारण जल प्रदूषित हो चुका है. इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है. ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर गंदगी डाली जा रही है, उसके समीप धार्मिक स्थल स्थित है.छठ महापर्व के दौरान घाट पर काफी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु, करते हैं पूजा-अर्चना
छठ महापर्व के दौरान इसी घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं. इसके अलावा आसपास के लोग प्रतिदिन नदी में स्नान करते हैं. पशुधन भी इसी जल का उपयोग करता है. ऐसे में नदी में मेडिकल और पशु अपशिष्ट फेंकना न केवल पर्यावरणीय अपराध है. बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर प्रशासन द्वारा उक्त स्थल पर गंदगी नहीं फैलाने को लेकर चेतावनी बोर्ड लगाया गया है. लेकिन उसके बावजूद नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर प्रशासनिक निगरानी के बावजूद ऐसे लोगों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं. विरोध प्रदर्शन में बादल कुमार साहा, राजा कुमार, मुकेश दास, अनिल गोसाई, पिंटू ठाकुर, रवि कुमार दास, विश्वजीत, मेघु दास, जहांगीर आलम सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे.अधिकारी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
नगर स्वच्छता पदाधिकारी अरुणिमा पूर्वे ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है, जल्द ही स्थल की सफाई कराई जायेगी. साथ ही गंदगी फैलाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
