कुरसेला क्षेत्र के किसानों ने इस साल आलू का बेहतर उपज प्राप्त किया है. लागत खर्च मेहनत के अनुरूप किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. बाजार के तय मूल्यों पर आलू फसल के बिक्री करना किसानों का मजबूरी बनी हुई है. आलू भंडारण के लिए शीत गृह के आसपास क्षेत्रों में नहीं होने से किसानों के लिए इसकी बिक्री करना विवशता हो गया है. किसानों के समक्ष शीतगृह में भंडारण की समस्या खड़ी हो जाती है. क्षेत्र के कुछेक किसान गेड़ाबाड़ी, नवगछिया, पूर्णिया आदि जगहों पर भंडारण करने में सफल होते हैं. अधिकतर किसान दूरी ट्रांसपोर्टिंग खर्च आदि के झमेलों की वजह से शीतगृह में भंडारण नहीं कर पाते हैं. किसान आलू पैदावार के बाद तत्काल उसकी बिक्री कर मोटे लाभ से वंचित रह जाते हैं. हालांकि इस साल अन्य वर्षों के तुलना में आलू की कीमत ठीक ठाक माना जा रहा है. जानकारी अनुसार इस वर्ष लाल आलू का दर प्रति क्विंटल 1200 और सफेद आलू की कीमत 900 से 1000 है. आलू की खेती करने वाले कृषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में आलू के कीमतों में उछाल आने का अधिक सम्भावना है. भंडारण सुविधा नहीं होने से किसान आलू के बढ़ते मूल्यों के लाभ से वंचित रहेंगे. आलू फसल किसान बेहतर पैदावार करने में सफल होते हैं. वैसे क्षेत्र में शीतगृह नहीं होने से पूर्व के अपेक्षा आलू की खेती में कमी आयी है. कुरसेला में तकरीबन डेढ़ दशक पूर्व आलू भंडारण के लिए शीतगृह हुआ करता था. गुजरे समय में कतिपय वजह से कुरसेला का शीतगृह बंद हो गया है. शीतगृह होने पर कुरसेला परिक्षेत्र में बड़े पैमाने पर किसान नगदी फसल के रुप में आलू की खेती किया करते थे. यह खेती किसानों के आय का जरिया हुआ करता था. कुरसेला का शीतगृह बंद पड़ने के बाद यह खेती अनुपात में कम होती चली गयी. किसानों के लिये आलू भंडारण का सुविधा का नहीं होना एक बड़ी समस्या है. प्रखंड क्षेत्र के अलावा सीमावर्ती प्रखंड समेली, रुपौली क्षेत्रों में किसान आलू का बेहतर उपज करते है. औसतन किसान भंडारण सुविधा के अभाव में लोकल बाजार के तय कीमतों में आलू बेचने को मजबूर हो जाते है. किसान शीतगृह भंडारण के अभाव में अगले आलू खेती के लिये बीजों को सुरक्षित नहीं रख पाते है.
भंडारण सुविधा अभाव में किसान आलू की बिक्री औने-पौने दाम पर करने को विवश
भंडारण सुविधा अभाव में किसान आलू की बिक्री औने-पौने दाम पर करने को विवश
