कटिहार के डंडखोरा से संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट.
Katihar News: गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों की पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने और कमजोर विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से डंडखोरा प्रखंड में समर कैंप की तैयारी तेज हो गई है. इसी कड़ी में प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) भवन डंडखोरा में शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. प्रशिक्षण में समर कैंप के संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं.
कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केआरपी रानी कुमारी ने कहा कि समर कैंप का मुख्य उद्देश्य कक्षा पांचवीं और छठी के उन विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना है, जिन्हें पढ़ाई में कठिनाई होती है या जिनकी बुनियादी समझ कमजोर है. उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को गतिविधि आधारित और रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा, ताकि विद्यालय खुलने के बाद वे आत्मविश्वास के साथ अपनी कक्षाओं में शामिल हो सकें.
उन्होंने कहा कि समर कैंप केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने और उनकी बुनियादी शैक्षणिक दक्षता को मजबूत करने का भी प्रयास किया जाएगा.
गतिविधि आधारित शिक्षण पर दिया गया जोर
प्रथम संस्था की प्रशिक्षक संगीता देवी ने प्रशिक्षण के दौरान शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों को समर कैंप संचालन की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बच्चों को खेल-खेल में सीखने, समूह गतिविधियों में भाग लेने और रचनात्मक तरीकों से पढ़ाई से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
उन्होंने नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करने और शिक्षण सामग्री के प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी साझा किए.
बच्चों के भविष्य को संवारने की पहल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में समर कैंप के संचालन, मूल्यांकन प्रक्रिया, समूह कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई. उपस्थित शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों ने इसे बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि इस पहल से बच्चों को सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा और उनकी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने में मदद मिलेगी.
शिक्षा विभाग की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में भी सीखने से जोड़े रखने और उन्हें नई शैक्षणिक ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
