दीदी की सिलाई घर से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बना समेली

Katihar News कटिहार के समेली में शुरू हुआ "दीदी की सिलाई घर" अब सिर्फ सिलाई केंद्र नहीं रहा. यह महिलाओं के सपनों, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुका है. यहां जुड़ी महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों के साथ अपनी कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं.

कटिहार के समेली से हरिओम कुमार की रिपोर्ट.

Katihar News: समेली प्रखंड के चकला मौलानगर पंचायत भवन में संचालित “दीदी की सिलाई घर” ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया केंद्र बनकर उभरा है. प्रतिष्ठा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड द्वारा संचालित इस पहल ने दर्जनों महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक पहचान दी है. आज यह केंद्र महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का ऐसा मॉडल बन गया है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है.

सिलाई मशीन से संवर रहे सपने

चकला मौलानगर पंचायत भवन में संचालित इस केंद्र में वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार की जा रही है. इस पहल से करीब 35 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है. काम शुरू करने से पहले महिलाओं को सात दिनों का विशेष सिलाई-कटाई प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे पेशेवर तरीके से कार्य कर सकें. प्रशिक्षण के बाद महिलाएं प्रतिदिन पांच से आठ सेट तक पोशाक तैयार कर रही हैं.

आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ते कदम

जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक प्रकाश सिंह के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. स्थानीय स्तर पर तैयार की जा रही पोशाकें आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रही हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.

अब स्कूल यूनिफॉर्म बनाने की तैयारी

केंद्र के एसी सुमित कुमार ने बताया कि प्रखंड में कुल 120 महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. फिलहाल 34 महिलाओं को चार बैचों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए यूनिफॉर्म तैयार करने की योजना भी है. इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे.

हर महीने बढ़ रही आमदनी और आत्मविश्वास

सिलाई केंद्र से जुड़ी महिलाएं वर्तमान में हर महीने छह से आठ हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी बढ़ा है. प्रशिक्षक राहुल कुमार मंडल का कहना है कि जीविका दीदियां अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की अग्रदूत बन रही हैं.

महिला सशक्तिकरण का बन रहा मॉडल

हाल ही में प्रमुख प्रतिनिधि संतोष कुमार पप्पू, उपप्रमुख कंचन देवी, मुखिया राजेश कुमार मंडल सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने केंद्र का निरीक्षण किया. उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

आज “दीदी की सिलाई घर” केवल कपड़े सिलने का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सपनों को आकार देने वाला मंच बन चुका है. यह पहल साबित कर रही है कि अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की नई इबारत भी लिख सकती हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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