कटिहार से राणा सिंह की रिपोर्ट
Katihar Government Hospital: कटिहार जिले के सरकारी अस्पतालों में अक्सर डॉक्टरों की लेट-लतीफी, स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति और मरीजों को दवा व जांच के लिए होने वाली परेशानियों की शिकायतों को स्वास्थ्य विभाग ने अब बेहद गंभीरता से लिया है. जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सरकारी अस्पतालों के कायाकल्प और डयूटी के प्रति पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘डिजिटल सर्विलांस’ (CCTV निगरानी) प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है. अब जिले के तमाम अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और पीएचसी की ओपीडी, इनडोर वार्ड व दवा काउंटरों की निगरानी सीधे जिला स्वास्थ्य समिति के कमांड सेंटर से लाइव की जा रही है.
मरीजों की सहूलियत पहली प्राथमिकता; हर विंग पर लाइव सीसीटीवी का पहरा
इस नई तकनीक-आधारित निगरानी व्यवस्था की कड़ियों और उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) डॉ. किसलय कुमार ने मुख्य बिंदु साझा किए:
- सतत मॉनिटरिंग: डीपीएम ने बताया कि अस्पतालों में स्थापित लाइव सीसीटीवी कैमरों के जरिए केवल परिसर की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वहां आने वाले मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की भी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है.
- जवाबदेही तय: इस तीसरी आंख के जरिए ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, एएनएम (ANM), जीएनएम, लैब टेक्नीशियन और कार्यालय के क्लर्कों की दैनिक उपस्थिति और मरीजों के प्रति उनके व्यवहार की सतत निगरानी की जा रही है.
- परेशानियों का ऑन-स्पॉट अंत: इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुदूर देहात से आने वाले किसी भी गरीब मरीज को मुफ्त दवा मिलने, एक्स-रे व पैथोलॉजी जांच कराने या आपातकालीन प्रसव सेवा के लिए दलालों का शिकार न होना पड़े और न ही घंटों कतारों में बेवजह भटकना पड़े.
लापरवाही मिलने पर सीधे शोकॉज और वेतन रोकने की होगी कार्रवाई
डिजिटल हंटर: कंट्रोल कमांड सेंटर सिर्फ लाइव फुटेज देखने तक सीमित नहीं रहेगा. यहां तैनात ऑपरेटरों द्वारा प्रतिदिन की फीडबैक रिपोर्ट तैयार कर सीधे वरीय अधिकारियों को भेजी जा रही है.
डीपीएम डॉ. किसलय कुमार ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि इस लाइव फीडबैक के आधार पर सभी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली का साप्ताहिक मूल्यांकन (Review) किया जाएगा. यदि किसी भी अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर समय से पहले ताला लटका मिला, या डॉक्टर अपनी निर्धारित शिफ्ट से नदारद पाए गए, तो किसी भी प्रकार स्पष्टीकरण का मौका दिए बिना संबंधित उपाधीक्षक या प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी. दोषी कर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन, विभागीय विभागीय कार्रवाई और नो-वर्क-नो-पे के तहत वेतन रोकने के कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे.
राज्य सरकार के ‘मशिन मोड’ का हिस्सा; पारदर्शी व्यवस्था की ओर कदम
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कवायद बिहार सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल सुधारों और ‘मिशन मोड’ का एक अहम हिस्सा है. तकनीक के इस दौर में अब कमान संभाल रहे अधिकारियों को निरीक्षण के लिए बार-बार फील्ड में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि एक ही स्क्रीन पर पूरे जिले के अस्पतालों का लाइव हाल दर्ज होगा. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के इस कदम का स्वागत किया है. लोगों का कहना है कि यदि यह सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था ईमानदारी से लागू रही, तो ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की दशा और दिशा में व्यापक और क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा.
