कटिहार. पूर्व उप मुख्यमंत्री सह सदर विधायक तारकिशोर प्रसाद ने बिहार विधानसभा के चालू सत्र में अपने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया की महानंदा, गंगा, कोसी और बरांडी नदी से घिरे कटिहार जिला में नाव के परिचालन मानक के अनुरूप पर्याप्त सरकारी घाटों का अभाव है. जिस कारण बड़ी संख्या में लोग उक्त नदियों के किनारे अवस्थित दर्जनों अवैध घाटों से यातायात करने को मजबूर हैं. जिससे जान-माल का खतरा बना रहता है. पूर्व उप मुख्यमंत्री ने 19 जनवरी 2025 को अमदाबाद प्रखंड के मेघु टोला अवस्थित अवैध घाट से परिचलित नाव के गंगा नदी में डूबने से कई लोगों के काल-कलवित होने की बात कहते हुए सरकार से जिले में अवैध घाटों से हो रहे नाव के परिचालन पर अविलंब रोक लगाने की मांग की. पूर्व उप मुख्यमंत्री के मांग को स्वीकारते हुए मंत्री परिवहन विभाग, शीला कुमारी ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि कटिहार जिले में कुल 37 सरकारी सैरात घाट है. जहां से कुल 1509 निबंधित नावों का परिचालन हो रहा है. उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे अवैध घाटों पर लगातार निगरानी रखने के लिए बंगाल नौ घाट अधिनियम 1885 के अधीन आदर्श नियमावली अधिनियम 2011 के तहत मोटर या निरीक्षक, अंचल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा अवैध घाटों एवं अवैध नाव परिचालन की समय-समय पर औचक जांच किया जाता है. अवैध परिचालन पर कार्रवाई करने के लिए सभी अंचल पदाधिकारी, सभी थाना अध्यक्ष एवं सभी अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देशित किया गया है. साथ ही मोटरयान निरीक्षक एवं जिला परिवहन पदाधिकारी कटिहार को जिला अंतर्गत सभी घाटों पर विशेष निगरानी रखने एवं गैर निबंधित नाव को जब्त करते हुए नाविक/नाव मलिक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
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