अंतरराष्ट्रीय कथक नर्तक राहुल कुमार रजक सम्मानित, मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने दिया सम्मान

कटिहार के कथक नर्तक राहुल कुमार रजक को पूर्णिया में शिक्षक सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया. उन्हें कला एवं नृत्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने पुरस्कृत किया. यह सम्मान युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है.

कटिहार. सीमांचल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, पूर्णिया प्रमंडल के तत्वावधान में पूर्णिया के प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया. समारोह में शिक्षा और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया. इसी क्रम में कटिहार के कथक नर्तक एवं नृत्य प्रशिक्षक राहुल कुमार रजक को उनकी नृत्य प्रस्तुति और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

नृत्य प्रस्तुति के लिए मिला सम्मान

समारोह के दौरान राहुल कुमार रजक ने कथक की प्रस्तुति दी. उनकी प्रस्तुति के बाद बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने उन्हें सम्मानित किया. राहुल कुमार रजक लंबे समय से शास्त्रीय नृत्य, विशेषकर कथक के क्षेत्र में साधना और प्रशिक्षण से जुड़े हैं. उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को विभिन्न मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता रहा है.

कला के क्षेत्र में पहले भी मिल चुका है सम्मान

राहुल कुमार रजक को कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार की ओर से प्रतिष्ठित ‘बिहार कला सम्मान-आम्रपाली पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है. कथक के क्षेत्र में उनके योगदान और कला के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मिला था. उनकी उपलब्धियां सीमांचल में शास्त्रीय नृत्य के प्रति बढ़ती रुचि और क्षेत्र की सांस्कृतिक प्रतिभाओं की मौजूदगी को भी सामने लाती हैं.

समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

शिक्षक सम्मान समारोह में बिहार सरकार की भवन निर्माण विभाग की मंत्री लेसी सिंह, पूर्णिया सदर विधायक विजय खेमका सहित शिक्षा, कला और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान शिक्षा और कला के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची कथक साधना

राहुल कुमार रजक ने शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपनी साधना और प्रस्तुतियों के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया है. कथक जैसी पारंपरिक शास्त्रीय कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए वह नृत्य प्रशिक्षण से भी जुड़े हुए हैं.

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी कला यात्रा

राहुल कुमार रजक का सम्मान सीमांचल की सांस्कृतिक परंपरा में शिक्षा और कला के महत्व को भी रेखांकित करता है. उनकी कथक-साधना और उपलब्धियां क्षेत्र के युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं. कला के प्रति निरंतर समर्पण और प्रशिक्षण के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य को आगे बढ़ाने का उनका प्रयास बिहार की समृद्ध कला परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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