कोढ़ा प्रखंड के जुराबगंज स्थित दारुल उलूम फैज़ुल कुरआन के प्रांगण में मंगलवार को एक भव्य जलसे का आयोजन किया गया. यह जलसा नमाजे असर के बाद आरंभ होकर पूरी रात चला और नमाजे फज्र तक चला. आयोजन में दूर-दराज के क्षेत्रों से हज़ारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शिरकत की. इसे ऐतिहासिक सफल आयोजन बना दिया. धार्मिक सभा में आए लोगों ने देश के नामी उलेमा, मुफ्ती और शाइर-ए-इस्लाम के तकरीर और नज्मों को बड़े ही श्रद्धा और गंभीरता से सुना. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इस्लामी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाना, कौमी यकजहती राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करना और समाज में शांति और भाईचारे का संदेश देना था. मुख्य वक्ताओं की उपस्थिति ने जलसे को बनाया ऐतिहासिक जलसे में बतौर मुख्य अतिथि देश के नामचीन इस्लामी विद्वानों ने भाग लिया. इनमें शामिल थे. हज़रत मौलाना मुफ्ती अब्दुल सलीम कलाम हज़रत मौलाना सोहराब साहब चापदानी, हज़रत मौलाना मुफ्ती सादुन्नजीब, कासमी हज़रत मौलाना मुफ्ती खालिद सैफुल्लाह, कासमी अल-हाज क़ारी, जुबेर आलम साहब हयाती इसके अलावा विशेष रूप से उपस्थित रहे. शाइरे इस्लाम और पंडित विश्व आनंद महाराज जी, जिनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बना दिया. साथ ही पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी जलसे में शिरकत कर आयोजन की शोभा बढ़ायी. तकरीर में अमन, शिक्षा और समाज सुधार का संदेश सभी मौलाना और मुफ्तियों ने अपने वक्तव्यों में वर्तमान देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुसलमानों से शिक्षा, एकता और शांति की राह अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस्लाम का मूल संदेश अमन, मोहब्बत और इंसानियत है. साथ ही उन्होंने समाज में फैल रही गलतफहमियों को दूर करने, शिक्षा के प्रचार-प्रसार और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया. जलसे के सफल आयोजन के लिए स्थानीय संगठन और दारुल उलूम की प्रबंधन समिति ने बेहतरीन इंतज़ाम किया. हजारों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, जलपान और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी. जिसे सभी ने सराहा. यह जलसा न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन था. बल्कि यह एक सामाजिक जागरूकता का केंद्र भी बना. अमन, तालीम और तरक्की का जो संदेश इस जलसे से निकला, वह समाज को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
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