किसानों पर दोहरी मार: बेमौसम बारिश से धान की फसल बर्बाद, रात में असामाजिक तत्वों ने कटाई मशीन को किया क्षतिग्रस्त

Harvesting Machine Damaged: कटिहार के मनसाही में किसानों के साथ प्रकृति के साथ-साथ असामाजिक तत्वों की भी क्रूर मार देखने को मिली है, कुरसेल झरकाहा बहियार में तैयार गरमा धान की फसल को बेमौसम बारिश से बचाने के लिए भाड़े पर लाई गई बड़ी कटाई मशीन को शरारती तत्वों ने तोड़फोड़ कर पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया.

कटिहार के मनसाही से ललित कुमार की रिपोर्ट

Harvesting Machine Damaged: कटिहार जिले के मनसाही थाना क्षेत्र से अन्नदाताओं के साथ अमानवीय कृत्य का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, यहाँ के कुरसेल झरकाहा बहियार में हजारों एकड़ में लगी गरमा धान की फसल अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है, जिसकी कटाई का काम भी शुरू कर दिया गया है. लेकिन, पिछले कुछ दिनों से जारी बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरना शुरू कर दिया है, खेतों में भारी जलजमाव होने और कटाई के लिए मजदूर न मिलने से परेशान किसानों ने फसल बचाने के लिए एक आधुनिक कदम उठाया था, जिसे असामाजिक तत्वों ने मटियामेट कर दिया.

फसल समेटने के लिए भाड़े पर मंगाई थी बड़ी मशीन, बारिश के कारण खेत में छोड़ा

इस पूरी घटना और किसानों की बेबसी का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित है:

  • मजदूरों की किल्लत: खेतों में पानी भर जाने और मजदूरों की कमी के कारण फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित समेटने के लिए क्षेत्र के कुछ किसानों ने आपस में मिलकर एक बड़ी धान कटाई मशीन (हार्वेस्टर) भाड़े पर मंगाई थी.
  • अचानक आई आफत: मशीन के जरिए खेतों में धान की कटाई का काम शुरू ही हुआ था कि अचानक तेज बारिश आ गई, मशीन काफी बड़ी और वजनी थी, इसलिए उसे बार-बार लाने और ले जाने की परेशानी से बचने के लिए किसान उसे सुरक्षित समझकर खेत में ही छोड़कर अपने-अपने घर चले आए.

सुबह पहुंचे तो टूटे मिले मशीन के पुर्जे, रो पड़े अन्नदाता

असामाजिक तत्वों की करतूत: शनिवार की सुबह जब किसान अपनी फसल की कटाई पूरी करने के लिए वापस खेत पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. रात के अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने उस कीमती कटाई मशीन में जमकर तोड़फोड़ की थी और उसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था, मशीन इस कदर बर्बाद हो चुकी है कि वह अब किसी भी हाल में काम करने के लायक नहीं बची है.

सालभर की जीविका पर संकट, क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश

पीड़ित किसानों ने अत्यंत भावुक और लाचार होते हुए कहा कि उन्होंने बहुत बड़ी उम्मीद और कर्ज के सहारे इस कटाई मशीन को मंगाया था ताकि मौसम खराब होने से पहले अपनी गाढ़ी कमाई को घर ला सकें, लेकिन उपद्रवियों ने उनके सारे अरमानों और उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब किसान अपनी आंखों के सामने तैयार फसल को बेमौसम बारिश और मौसम की मार में सड़ते हुए देखने को विवश हैं, किसानों के अनुसार इसी फसल से उनके पूरे परिवार का सालभर का दाना-पानी और घर चलता है, यदि फसल समय पर नहीं समेटी गई तो वे पूरी तरह से आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएंगे.

इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है, क्षेत्र के आम नागरिकों और प्रबुद्ध लोगों ने अन्नदाताओं के साथ किए गए इस बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है, तथा स्थानीय प्रशासन से दोषियों को जल्द चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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