आस्था का केंद्र है बाटा चौक का ऐतिहासिक कष्टहरण गौरीशंकर नाथ मंदिर, जानें पूजा व आरती का सही समय

Gaurishankarnath Temple: कटिहार शहर के हृदयस्थली में बसा श्री श्री 108 कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर सदियों से लाखों सनातनी स्वावलंबियों और शिवभक्तों की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से किया गया जलाभिषेक भक्तों के बड़े से बड़े कष्टों को पल भर में हर लेता है.

कटिहार से सूरज कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Gaurishankarnath Temple: कटिहार नगर क्षेत्र के डॉ. राजेंद्र प्रसाद पथ (बाटा चौक) के समीप स्थित श्री श्री 108 कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर शहर के सबसे प्रमुख, प्राचीन और सिद्ध शिव मंदिरों में से एक माना जाता है. शुक्रवार को भी हर आम दिनों की तरह यहाँ सवेरे से ही बाबा भोलेनाथ के दर्शन, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. मंदिर के मुख्य पुजारी हेमचंद्र भारती ने बताया कि इस ऐतिहासिक मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है और यहाँ प्रतिदिन सुबह व शाम को होने वाली महाआरती में हिस्सा लेने के लिए पूरे जिले से बड़ी संख्या में अकीदतमंद और श्रद्धालु पहुंचते हैं.

मंदिर के पुजारी ने बताया पूजा-अर्चना और महाआरती का समय

भक्तों की सुविधा और सुचारू दर्शन व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रबंधन और पुजारी हेमचंद्र भारती द्वारा पूजा एवं आरती का समय निर्धारित किया गया है, जो इस प्रकार है:

  • सुबह का सत्र:
    • पूजा-अर्चना प्रारंभ: सवेरे 07:00 बजे से.
    • सुबह की मुख्य आरती: सवेरे 08:00 बजे के आसपास.
  • दोपहर का विश्राम काल: दोपहर 01:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक मुख्य गर्भगृह में पूजा-अर्चना पूर्णतः वर्जित (बंद) रहती है.
  • शाम का सत्र:
    • संध्या पूजा: अपराह्न 04:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक.
    • शयन/संध्या आरती: रात्रि 08:00 बजे के आसपास (आरती के तुरंत बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं).

बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन है 116 वर्ष पुराना यह धाम

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: स्थानीय मान्यताओं और बुजुर्गों के अनुसार, यह पवित्र मंदिर वर्ष 1910 या उससे भी अधिक पुराने समय से भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र रहा है. वर्तमान में यह संपूर्ण मंदिर परिसर आधिकारिक तौर पर ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड’ (Bihar State Religious Trust Board) के अधीन संचालित है.

परिसर का स्वरूप:

कष्टहरण नाथ गौरीशंकर मंदिर परिसर के मुख्य भाग में देवाधिदेव महादेव का भव्य मंदिर स्थापित है, जहाँ दिव्य शिवलिंग विराजमान है. इसके अतिरिक्त, इसी प्रांगण में श्रद्धालुओं की परिक्रमा के लिए माता पार्वती, भगवान राधा-कृष्ण, और संकटमोचन हनुमान जी के भी अलग-अलग भव्य और आकर्षक नक्काशीदार मंदिर बनाए गए हैं, जहाँ लोग शीश नवाते हैं.

सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर ठहर जाता है शहर का ट्रैफिक

महाशिवरात्रि और सावन के पवित्र महीने में इस प्राचीन धाम का नजारा देखने लायक होता है. सावन के प्रत्येक सोमवार को यहाँ बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है और कांवरियों व स्थानीय भक्तों द्वारा अखंड जलाभिषेक का आयोजन होता है.

श्रद्धालुओं के लिए विशेष गाइडलाइन:

पर्व-त्योहारों और विशेष तिथियों पर मंदिर के मुख्य मार्ग (बाटा चौक) के आसपास चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए बेहद सीमित जगह होती है. इसलिए, जाम से बचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल या स्थानीय ई-रिक्शा से यात्रा करने की सलाह दी जाती है. यदि कोई बाहरी जिला या सुदूर क्षेत्र से यहाँ दर्शन के लिए आना चाहता है, तो वह कटिहार जंक्शन (रेलवे स्टेशन) पर उतरकर वहाँ से सीधे ऑटो, रिक्शा या पैदल ही बेहद आसानी से और चंद मिनटों में इस प्रसिद्ध मंदिर तक पहुंच सकता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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