कटिहार : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से कटिहार जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. अमदाबाद, मनिहारी, बरारी और कुरसेला प्रखंड के कई इलाकों में बड़ी आबादी बाढ़ से प्रभावित है. कई जगह घरों में पानी घुसने के बाद लोग अपना घर छोड़कर ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं.
अमदाबाद में सबसे ज्यादा बिगड़े हालात
अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है. यहां बड़ी आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है. लखनपुर पंचायत समेत कई पंचायतों में ढाई सौ से अधिक घरों की बस्ती पानी में डूब गयी है.
घर छोड़ने के बाद बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बांध पर टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं. कई परिवारों के सामने रहने, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है.
कुरसेला, बरारी और मनिहारी भी प्रभावित
अमदाबाद के अलावा कुरसेला, बरारी और मनिहारी प्रखंड के कई इलाकों में भी बाढ़ का असर है. लगातार बढ़ते पानी से खेत डूब गये हैं और हजारों एकड़ में लगी फसल प्रभावित हुई है.
बाढ़ के कारण पशुपालकों के सामने चारे का संकट भी गहरा गया है. पशुओं को सुरक्षित रखने के साथ उनके लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है. वहीं, बाढ़ से लोगों का काम-धंधा भी प्रभावित हुआ है.
स्कूलों में घुसा पानी, पढ़ाई पर असर
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है. कई सरकारी स्कूलों में पानी घुसने के कारण स्कूल बंद करने पड़े हैं. इससे बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने तक सामान्य जनजीवन और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रहने की आशंका है.
सामुदायिक किचन चल रहे, राहत को लेकर शिकायत
बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचन संचालित किये जा रहे हैं. हालांकि, कई प्रभावित लोगों ने भोजन और राहत सामग्री की व्यवस्था को लेकर शिकायत की है.
लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है और भोजन की व्यवस्था भी उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रही है. प्रशासनिक अमला लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और राहत कार्य में जुटा है.
पानी उतरने का इंतजार
बाढ़ प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद अब गंगा के जलस्तर में कमी आने पर टिकी है. लोगों का कहना है कि जब तक पानी पूरी तरह नहीं उतरता, तब तक उनके सामने घर लौटने और सामान्य जिंदगी शुरू करने की स्थिति नहीं बनेगी.
बाढ़ ने लोगों के घर, खेत, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है. ऐसे में प्रभावित परिवारों को पानी घटने के साथ-साथ राहत और पुनर्वास की भी उम्मीद है.