मनिहारी आरटीआई लागू होने के 20 साल पूर्ण होने पर डॉ सदानंद पॉल को सम्मानित किया. आरटीआई आवेदनों की संख्या 1 लाख से अधिक होने पर बेगूसराय की श्वेता भारती ने सम्मानित की. पुष्पगुच्छ, शॉल, डायरी प्रदान कर सम्मानित किया. 20 साल पहले 12 अक्तूबर 2005 को भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था. मनिहारी के नवाबगंज निवासी सदानन्द पॉल ने जनहित में तब से लेकर अबतक 1 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन लिख चुके हैं. प्रथम अपील और द्वितीय अपीलों की संख्या जोड़ दिया जाय तो इनकी संख्या और भी बढ़ जायेगी. उन्होंने जम्मू कश्मीर, लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर, दक्षिण और पश्चिम भारत में भी आरटीआई आवेदनों को भेजे हैं. उनके जवाब भी प्राप्त हुए है. केन्द्रीय सरकार के सभी विभागों और राज्य सरकारों के सभी विभागों से डॉ. पॉल के द्वारा सूचना मंगवाया गया है. राष्ट्रपति कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, पीएमओ, गृह मंत्रालय, रेलवे, डाक सहित संघ लोक सेवा आयोग, बिहार लोक सेवा आयोग, जेपीएससी इत्यादि आयोगों और बिहार विद्यालय परीक्षा समितियों को लेकर उनके आरटीआई आवेदन अग्रगण्य है. मनिहारी साहिबगंज सड़क पुल, तेजनारायणपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण, कोचिंग व्यवस्था का रजिस्ट्रीकरण, मनिहारी कटिहार सड़क निर्माण, डाक टिकटों में सामान्य जनों के लिए फोटो व्यवस्था, नई पेंशन नीति, ईपीएफ नीति में सुधार, रेलवे प्लेटफॉर्म में शौचालय, एक्सप्रेस ट्रेन से साइड मिडिल बर्थ हटाना, गंगा सफाई, केरल का नारियल विकास बोर्ड, तमिलनाडु का सीएमसी हॉस्पिटल, मुग़ल गार्डन, रुपये का प्रतीक का कॉपीराइट, सभी राज्यों के शिक्षा विभाग, बिजली बोर्ड, सभी विश्वविद्यालय, सबौर कृषि, गलत तरीके से बहाली को ख़त्म करना, फिल्म सेंसर बोर्ड, राष्ट्रपति सचिवालय का संपत्ति विवरण आदि शामिल है. डाॅ पाल को डॉ राघवेन्द्र झा, आशीष सिंह, करन मानस, मंटू सुमन, सुधांसु सुधाकर, स्वर्णलता, अर्चना कुमारी, विजय कुमार, ब्रजेश सुमन, दर्शन पोद्दार, बबलू मंडल, हबीबुर्रहमान, प्रदीप झा, नीतू सिंह, प्राची, आर एस गौहर, शांति, प्रियंका, अनुप्रिया, रिया समेत शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी है.
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