बरारी काढागोला घाट पर कई जिलों के लोगों का शवदाह के लिए आना होता रहता है. शमशान घाट तो साफ व स्वच्छ रहता है. अंतिम संस्कार करने एवं वहां पर संस्कार कार्यक्रम को पूरा करने तक तीन से चार घंटा का समय लगता है. एक तो शमशान घाट पर बैकुंठ धाम का नहीं होना काफी कष्ट दायक है. घंटों कार्यक्रम के लिए घाट पर खड़ा रहना जहां बैठने तक की कोई व्यवस्था यानि शेड, कुर्सी, पेयजल कोई व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. जोगबनी से शबदाह कराने आये राजेश कुमार, दिवेश, नकीश, उत्पल आदि बताते है कि प्राचीन काढागोला गंगा घाट में पूर्वज आते थे. उस वक्त जो व्यवस्था होती थी वह आज नहीं है. जबकि सरकार काफी योजनाएं चला रखी है. यहां के जनप्रतिनिधि का इन सब बातों पर ध्यान नहीं है या फिर विकास कराना नहीं चाहते है. घाट पर दुकान कर रहे दुकानदार बताते है कि अभी बड़ी बड़ी बसों से लोग दाह संस्कार के लिए कई जिलों से लोग आते है. यहां सौंदर्यीकरण के साथ विकास होना चाहिए. सांसद, विधायक एवं स्थानीय लोगों को आगे बढ़ना होगा.
काढागोला घाट पर बैकुंठ धाम भवन बनाने की मांग उठी
काढागोला घाट पर बैकुंठ धाम भवन बनाने की मांग उठी
