बिहार दिवस: काव्य पाठ से की बिहार के गौरव गाथा

बिहार दिवस: काव्य पाठ से की बिहार के गौरव गाथा

कटिहार जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन कटिहार के तत्वावधान में बिहार दिवस पर वर्चुअल मंच पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया. आयोजन में बिहार केंद्रित कविताओं का कवियों ने पाठ किया. कविता में मूलतः बिहार गौरव का गान किया. कवि विनोद मिश्र की कविता परीक्षक से उत्तम परीक्षार्थी दिखे तो समझ लेना बिहारी है, वहीं कवि नैतिक की कविता ज्ञान बने सच्चा आधार, उन्नत बिहार उज्ज्वल बिहार ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया. कवियत्री लक्ष्मी कुमारी की कविता बुद्ध को भी जहां ज्ञान मिला ने बिहार की शैक्षणिक और आध्यात्मिक ऊंचाई को व्यक्त किया. कवि गिरिधर कुमार की पंक्ति – गांव की पगडंडी से राजपथ तक अतुलनीय मेरा बिहार व कामेश्वर पंकज की ””प्रण में तिरंगा व्रत धारी, हम बिहारी और कवि उमेश कुमार की पंक्तियां आर्यभट्ट का आविष्कार हूं, विज्ञान का विस्तार हूं आदि उच्च श्रेणी की कविताएं रहीं. कवियों ने बिहारी होने पर अपने को गौरवान्वित महसूस किया. यह चर्चा आम रही कि हम बिहारी सब पर भारी. इस संगोष्ठी का संचालन संस्था के प्रचार मंत्री डॉ अजय कुमार ने किया और अध्यक्षता वरिष्ठ कवि कन्हैया प्रसाद केसरी ने किया. अध्यक्षीय भाषण में केसरी ने सभी कवियों की भूरी-भूरी प्रशंसा की और अन्य श्रोताओं को का आप भी गोष्ठी में जुड़ने के लिए आभार व्यक्त किया. धन्यवाद ज्ञापन लक्ष्मी कुमारी ने किया.

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By RAJKISHOR K

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