बांग्लादेश में अमेरिकी मक्का की एंट्री से टूटा बाजार, 1750 रुपये क्विंटल पर सिमटा

बांग्लादेश में अमेरिकी मक्का की एंट्री से टूटा बाजार, 1750 रुपये क्विंटल पर सिमटा

– इथनॉल नीति में बदलाव व घटती मांग से स्टॉकिस्ट भी बेदम, नए सीजन से पहले किसानों में मायूसी कोढ़ा मक्का की फसल तैयार होने से पहले ही बाजार में निराशा का माहौल है. आमतौर पर बड़े किसान व कारोबारी मक्का तैयार होते ही उसे बेचने से बचते हैं और बेहतर कीमत के इंतजार में गोदामों में स्टॉक कर लेते हैं. कई किसानों ने जरूरत के अनुसार निजी गोदाम बना रखे हैं. कारोबारियों ने भी एक से अधिक भंडारण केंद्र तैयार किया है. हर वर्ष मार्च के अंत से मक्का की आवक शुरू होती है और जुलाई-अगस्त तक बाजार में आपूर्ति अधिक रहती है. जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है. इसके बाद ऑफ सीजन में मांग बढ़ने पर भाव सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाता था. लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है. 2500 से लुढ़ककर 1750 रुपये क्विंटल पर पहुंचा भाव कारोबारियों के अनुसार जनवरी-फरवरी में मक्का का औसत भाव करीब 2500 रुपये प्रति क्विंटल था, जो संतोषजनक माना जा रहा था. लेकिन अचानक मांग घटने से कीमत गिरकर 1750 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. हैरानी की बात यह है कि यह दर उस समय की तुलना में भी कम है. जब फसल की अधिक आवक के कारण बाजार दबाव में रहता है. कहते हैं मक्का कारोबारी मक्का कारोबारी दीपक केसरी ने कहा कि जनवरी से मार्च तक आमतौर पर मक्का का भाव सर्वोच्च रहता था. इसी उम्मीद में कई कारोबारी स्टॉक करते थे. लेकिन इस बार इथनॉल फैक्ट्रियों में मांग घट गई है और बांग्लादेश को अमेरिका से मक्का की आपूर्ति शुरू होने से निर्यात भी प्रभावित हुआ है. स्थिति सभी के लिए चिंताजनक है. युवा किसान रेहान सोहेल ने कहा कि पिछले वर्ष अधिकांश किसानों ने 2000 रुपये प्रति क्विंटल या उससे अधिक कीमत पर मक्का बेचा था. इस बार अगर फसल आने से पहले ही भाव 1750 रुपये है, तो फसल की आवक बढ़ने पर कीमत और नीचे जाने की आशंका है. इथनॉल नीति ने बदली बाजार की दिशा राज्य की इथनॉल फैक्ट्रियों में पहले बड़ी मात्रा में मक्का की खपत होती थी. जिससे बाजार को मजबूत सहारा मिलता था. पर नई नीति के तहत उत्पादन क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है और 40 प्रतिशत तक चावल के उपयोग की बाध्यता भी लागू की गई है. इससे मक्का की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है. बांग्लादेश बाजार से भी झटका ऑफ सीजन में बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में मक्का निर्यात होता था. जिससे स्थानीय बाजार को मजबूती मिलती थी. लेकिन अमेरिका से सीधे मक्का आपूर्ति शुरू होने के कारण बांग्लादेश की मांग लगभग आधी रह गई है. इसका सीधा असर स्थानीय स्टॉकिस्ट और किसानों पर पड़ा है. अप्रैल से नई फसल की दस्तक अप्रैल के आरंभ से क्षेत्र में नई फसल की आवक शुरू हो जायेगी. मौजूदा दरें यह संकेत दे रही हैं कि इस सीजन में किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पायेगा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग में तेजी नहीं आई तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है. मक्का बाजार इस वर्ष दोहरी मार झेल रहा है. एक ओर इथनॉल नीति में बदलाव से घरेलू मांग घटी है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी मक्का की आपूर्ति ने निर्यात को प्रभावित किया है. ऐसे में किसान और कारोबारी दोनों ही आने वाले सीजन को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJKISHOR K

RAJKISHOR K is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >