कटिहार के आजमनगर से नदीम अख्तर की रिपोर्ट:
आरटीआई के बाद भी सीओ ने साधी चुप्पी, नहीं दिया जवाब
यह पूरा मामला दनिहां पंचायत के मौजा दौवलताबाद (थाना नंबर 595) का है. आरोप है कि अंचल कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन का निजीकरण कर दिया गया. इस वित्तीय गड़बड़ी को उजागर करने के लिए आजमनगर के स्थानीय निवासी आशीष कुमार दास ने साल 2025 में सूचना का अधिकार के तहत अंचल कार्यालय से जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां और दस्तावेज मांगे थे. हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी अंचलाधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है.
फर्जी तरीके से इन नामों पर कायम की गई जमाबंदी
शिकायत के अनुसार, अंचल कार्यालय ने कथित तौर पर फर्जी तरीके से कांड संख्या 38(क) वर्ष 2017-18 दर्ज किया. इसके बाद इस सरकारी जमीन को राघौल पंचायत के ग्राम झौवा दरयापुर निवासी जीनत परवीन (पति मासूम राजा) और शाइस्ता परवीन (पति मसूद आलम) के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया. इस अवैध खेल में खाता संख्या 224, खेसरा संख्या 875 और जमाबंदी संख्या 1063 दर्शाई गई है. मामले को लेकर भूमि उप समाहर्ता बारसोई, राजस्व अधिकारी आजमनगर और एडीएम कटिहार को भी लिखित आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
भ्रष्टाचार के आरोपों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में अंचल प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि आजमनगर अंचल में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. हाल के दिनों में ऑनलाइन 30 हजार रुपये रिश्वत लेने से लेकर सरकारी जमीनों पर निजी जमाबंदी जैसे कई संगीन मामले उजागर हो चुके हैं. लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद अंचलाधिकारी पर कोई कार्रवाई न होना जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है. आवेदक आशीष कुमार दास ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरटीआई का जवाब और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे.
मामले पर क्या बोले अंचलाधिकारी
जब इस पूरे विवाद को लेकर आजमनगर के अंचलाधिकारी मो रिजवान आलम से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें अभी तक इस आरटीआई से संबंधित कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि कार्यालय के रिकॉर्ड्स को वेरीफाई करने के बाद ही इस विषय पर कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा और उचित जवाब दिया जाएगा.
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