सड़क किनारे पटी हैं खान-पान की दुकाने
कटिहार : शहरवासी बाहरी खाने के नाम पर शरीर में जहर घोल रहे हैं. सड़को पर नाश्ता नमकीन खिला रहे हाथ ठेलेवाला सड़को पर नाश्ता और नमकीन खिला रहे हैं .हाथ ठेले बीमारियों का घर है. इन वाहनों पर धुआं और रसायन चिपक रहे हैं. मनमानी कीमत वसूलने वाले होटल रेस्टोरेंट भी गंदगी से अछूते नहीं है. इन होटलों के गोदाम में कई सामान खुले पड़े रहते हैं. शहर के सभी दुकानों में मक्खियां मंडराती और चूहे घूमते रहते हैं. साफ सफाई की होटल में कोई व्यवस्था नहीं होने से ग्राहक मजबूरन खाना खाने को मजबूर हैं. खानपान के लिए जिले के मशहूर भोजनालय का भी यही हाल है.
खुले में बन रही खानपान की सामग्री : शहर में मिरचाईबाड़ी से लेकर पूरे मंगल बाजार सड़क किनारे खाने की सामग्री बनायी जाती है. रोड के किनारे बनाने के क्रम में धूल धुआं एवं संक्रमित मक्खियां खाने पर मंडराते रहती है .कई मिठाई दुकानों के बाहर सड़क पर चूल्हे पर रोटियां व सब्जियां रोजाना सड़क किनारे बनाती है.शहर में कई दुकानों पर नमकीन भी बार-बार एक ही तेल में चले जाते हैं. जो स्वास्थ्य के लिए घातक है. जीआरपी चौक पर आये दिन ठेला खड़ा होता है. इसमें कचौरी छोले-भटूरे व पराठे बेचे जाते हैं. उक्त जगह गंदगी पसरी रहती है. वाहनों की आवाजाही से धूल भी उड़ता है. यहां एक दुकानदार खुले में सब्जी काटते नजर आता है, जबकि यह जगह रात में मूत्रालय बन जाती है. यहां से हजारों यात्री ट्रेन से उतरते हैं.और भोजन नाश्ता के साथ साथ कई बीमारियां अपने साथ ले जाते हैं. खाने पीने की चीजें सड़क पर होने से इन गैस के दुष्प्रभाव से शरीर को भारी नुकसान पहुंचता है. इसके कारण चक्कर आना ऑक्सीजन की कमी आदि जैसी बीमारियां तक ग्राहक को हो जाता है. इन मैं ज्यादातर हाथ ठेले वाले दुकानदार है .जिला प्रशासन को जानकारी के बावजूद इन दुकानदारों के ऊपर प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होने के कारण जिले में बिना पंजीकृत होटल, रेस्टोरेंट रोजाना खुलते हैं.
