उपेक्षा. काली व कसमा घाट पार करने में लोगों को लगता है डर
प्रखंड के रायपुर पंचायत अंतर्गत गोरफर के समीप काली घाट व कसबा घाट में पुल निर्माण तथा बठेली रक्शा कुर्बानी भिट्ठा से पररिया शरमत्ती होते हुये नवादा तक जाने वाली सड़क का निर्माण नहीं होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश पनप रहा है.
डंडखोरा : कई वर्षो से काली घाट व कसबा घाट में पुल निर्माण का मामला अधर में लटका हुआ है. जबकि स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, प्रधान सचिव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को भी सड़क व पुल निर्माण कराने की मांग की है. उल्लेखनीय है कि इस पुल निर्माण को लेकर जिला संचालन समिति द्वारा दिनांक 28.05.2013 की बैठक में पारित कराकर जिला योजना पदाधिकारी के ज्ञापांक 515 दिनांक 15.06.2013 के द्वारा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को भेजी जा चुकी है. इसके बावजूद वर्षों से पुल सह सड़क निर्माण नहीं होने की वजह से आम लोगों को नदी पार कर आवाजाही करनी पड़ती है.
कई गांवों के लोगों को नदी की वजह से छह किलोमीटर दूरी तय कर गंतव्य स्थान जाना पड़ता है. इस बीच कारी घाट, कसमा धार पुल निर्माण संघर्ष समिति का गठन का स्थानीय लोगों ने पिछले वर्ष प्रखंड कार्यालय में धरना प्रदर्शन भी किया था.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सात निश्चय के तहत गांव व टोलो के गलियो को पक्कीकरण कराने के लिये सरकारी अमला को दिशा निर्देश देते रहे हैं. इसके लिये काम भी शुरू कर दिया गया है. लेकिन कुर्बानी भिट्ठा, बठेली, रक्शा से पररिया, शरमत्ती गोरफर होते हुये नवादा तक जाने वाली सड़क निर्माण को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है. इसी पथ में गोरफर के पास कसमा घाट व काली घाट पुल निर्माण का मामला अधर में लटका हुआ है. उल्लेखनीय है कि यह पथ बठेली से कटिहार को जोड़ने वाली पथ से जुड़ा है. उधर नवादा में पीडब्लूडी पथ से यह लिंकेज है. अगर करीब पांच किलोमीटर का यह पथ व पुल का निर्माण हो जाता है तो कटिहार से बारसोई बलरामपुर जाने के लिये भी लोगों को अत्यधिक रेलवे गुमटी पार नहीं करना पड़ेगा. साथ ही आमलोगों को भी इस पथ पर पुल बनने से काफी लाभ मिलेगा.
कहते हैं स्थानीय लोग
स्थानीय निवासी दीपू सिंह, चितरंजन भारती उर्फ लड्डू, हरिमोहन सिंह, श्रवण सन्यासी, देव नारायण पोद्दार आदि ने कहा कि कई बार राज्य सरकार को व स्थानीय जनप्रतिनिधि को इस मामले में अवगत कराया गया है. कई बार प्रखंड मुख्यालय में धरना प्रदर्शन भी किया गया. इसके बावजूद अब तक सरकार के द्वारा कोई पहल नहीं की गयी है. इनलोगों ने बताया कि राशन की दुकान से अनाज उठाने के लिये नदी पार करना पड़ता है. नदी पार करने में कभी-कभी दुर्घटना भी हो जाती है. अधिकांश लोग नदी की वजह से पांच छह किलोमीटर दूरी तय कर राशन उठाने व अन्य काम करने के लिये गोरफर को जाते हैं.
कहती है प्रमुख: प्रंखड प्रमुख पूनम देवी ने इस संदर्भ में कहा कि पुल व सड़क निर्माण नही होने से लोगों को कठिनाई होती है. स्थानीय लोगों ने कई बार सरकार को मांग पत्र भी दिया है. पंचायत समिति की बैठक में भी पूल निर्माण को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है. सरकार को जल्द ही इस दिशा में पहल करनी चाहिए.
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