कटिहार. आरपीएफ कमांडेट मोहम्मद शाकिब ने मंगलवार को कटिहार प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे. इस क्रम में कटिहार प्लेटफाॅर्म पर तैनात आरपीएफ पुलिस पदाधिकारी व पुलिस जवान को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई निर्देश दिये. रेलवे प्लेटफॉर्म के प्रवेश द्वार पर स्कैनिंग मशीन पर तैनात महिला पुलिस कर्मी को आवश्यक निर्देश दिया. श्री साकिब ने कहा कि प्रेवश द्वार के बजाय यात्री एक्जिट प्वांइट से भी प्रवेश कर जाते है . उक्त स्थान पर सुरक्षा बलों की तैनाती का निर्देश दिया. मौके पर आरपीएफ कार्यालय प्रभारी उज्ज्वल प्रसाद, पंकज सिंह सहित अन्य आरपीएफ पदाधिकारी व जवान उपस्थित थे.
…साहब एक टॉयलेट तो बनवा दीिजए
समाहरणालय में विभिन्न विभाग संचालित किया जा रहा है. हर दिन बड़े संख्या में लोग अपने-अपने कामों को लेकर समाहरणालय पहुंचते हैं. समाहरणालय में ग्राउंड फ्लोर के अलावा दो मंजिल है. पहली मंजिल पर जिला पदाधिकारी कक्ष के अलावे विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय कार्यालय संचालित है. जबकि दूसरी मंजिल पर पुलिसअधीक्षक का कार्यालय है. ग्राउंड फ्लोर पर अपर समाहर्ता सहित जिला स्तरीय अन्य विभागों का कार्यालय संचालित है.
समाहरणालय परिसर में आम लोगों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी पेयजल व टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए मशक्कत करनी पड़ती है. हालांकि अधिकारियों का दावा है कि समाहरणालय परिसर में तीन चापाकल लगाये गये हैं. जबकि समाहरणालय के पीछे शौचालय की व्यवस्था की गयी है. जमीनी स्तर पर अधिकारियों का दावा खोखला दिखता है. जिस चापाकल की बात अधिकारी करते हैं. उनमें से एक पूरी तरह खराब हो चुकी है. जबकि एक अन्य चापाकल से अत्यधिक आयरन की मात्रा निकलती है. वहीं टॉयलेट के लिए समाहरणालय के अधिकांश कर्मचारियों को बाहर जाना पड़ता है.
पेयजल का है घोर संकट : समाहरणालय परिसर में सुरक्षित पेयजल का घोर संकट है. समाहरणालय परिसर में जो चापाकल लगाये गये हैं. वह पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है. एक चापाकल पूरी तरह खराब हो चुका है, जबकि हाल ही में लगाये गये एक अन्य चापाकल के पानी में अत्यधिक आयरन होने की वजह से वह अनुपयोगी साबित हो रहा है. साथ ही यह चापाकल समाहरणालय के एक कोने में बड़े-बड़े घास के बीच लगाया गया है. जहां लोग जाने से कतराते हैं.
टॉयलेट की भी सुविधा नहीं : पेयजल के अलावा समाहरणालय परिसर में टॉयलेट की भी समस्या है. हालांकि जिला प्रशासन ने समाहरणालय के पीछे शौचालय बनाया है. जहां समाहरणालय के कर्मचारी जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग करते हैं. समाहरणालय परिसर के विभिन्न विभागों में टॉयलेट नहीं होने से कर्मचारियों को भी परेशानी उठाना पड़ता है.
