कटिहार जिला स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है.
कटिहार : सात निश्चय के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन की तैयारी को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा की जा रही तैयारी अब अंतिम चरण में है. सात निश्चय के द्वारा अगले चार वर्षो में बिहार को विकसित बनाने का संकल्प लिया गया है.
आने वाले वर्षो में बिहार की कैसी तस्वीर बनेगी यह तो वक्त ही बतायेगा पर मौजूदा समय में कटिहार जिला स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिये तरस रहा है. एक तरफ तमाम दावों के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को नहीं मिल पा रही है तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य की स्थिति भी बदहाल है.
हालांकि केंद्र व राज्य सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य को जन जन तक पहुंचाने के लिये कई तरह के प्रयास किये हैं. मुख्यमंत्री सात निश्चय के तहत अपने निश्चय यात्रा में दस दिसंबर को कटिहार में रहेंगे. ऐसे में प्रभात खबर ने आम लोगों से जुड़ी बुनियादी हालात की पड़ताल नजदीक से की है. प्रभात खबर के दूसरी किस्त के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा हालात की स्थिति को प्रस्तुत कर रही है. स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल करती यह रिपोर्ट.
नहीं मिल रहा स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
सदर अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लोगों को सरकारी दावे के अनुरूप स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल रही है. अस्पतालों में मरीजों के देखरेख को लेकर बनायी गयी रोगी कल्याण समिति भी सिर्फ औपचारिकता निभाती रही है. समिति के नियमावली के आधार पर समय पर बैठके जरूर होती रही है पर मरीजों के हित में काम नहीं होती. आये दिन मरीजों के साथ हो रही परेशानी मीडिया में भी सुर्खिया बनती रही है. लेकिन अब तक किसी तरह की सुधार नहीं हो पा रही है. जबकि बड़ी तादाद में गरीब व मजदूर वर्ग के मरीज सरकारी अस्पताल आते हैं. यहां तक कि सरकारी अस्पतालों में उपचार करने के बजाय मरीजों को निजी नर्सिंग होम में भेजने के लिये प्रेरित किया जाता है.
फर्श पर होता है इलाज
जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल को जिला अस्पताल का दर्जा प्राप्त है. इसको लेकर दो तीन वर्ष पूर्व ही 300 बेड का अस्पताल बनाने के लिये विभाग से निर्देश प्राप्त हो चुका है. लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता की वजह से सदर अस्पताल कटिहार अब तक 300 बेड का अस्पताल नहीं बन सका है. प्रशासनिक व जनप्रतिनिधि की उदासीनता की वजह से 300 बेड का अस्पताल नहीं बनने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल सदर अस्पताल में करीब 100 बेड काम कर रहा है. मरीजों की अधिकता होने पर उसे फर्श पर रखकर उपचार किया जाता है. ऐसा नहीं है कि इस दौरान सरकारी भवन नहीं बने हैं.
स्वास्थ्य विभाग सहित दूसरे अन्य विभागों के भी नये-नये भवन बनाये गये पर सदर अस्पताल 300 बेड का अस्पताल नहीं बन सका. स्थानीय सूत्रों की माने तो आवंटन के बावजूद इस मामले में प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है.
