निर्देश . खाली जमीन से टैक्स वसूलने के आदेश से हड़कंप
राज्य सरकार ने नया निर्देश जारी कर नगर निगम क्षेत्र की खाली पड़ी जमीन से भी टैक्स वसूलने का निर्देश दिया है. नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी इस आदेश के बाद आनन-फानन में नगर निगम ने बैठक कर निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करने की रणनीति बनायी है.
कटिहार : नगर विकास एवं आवास विभाग के इस आदेश के बाद नगर निगम क्षेत्र के भू-स्वामियों के बीच हड़कंप मच गया है. उल्लेखनीय है कि कटिहार नगर निगम क्षेत्र के बड़े भूभाग खाली पड़े हुए हैं. दरअसल नगर निगम का दर्जा पाने को लेकर सरकार ने जो मानक तय किये थे, उसमें तत्कालीन नगर परिषद के भूभाग को लेकर नगर निगम बनाना मुश्किल था. ऐसे में ग्रामीण इलाके के बड़े भू भाग को शहरी क्षेत्र में शामिल कर कटिहार को नगर निगम का दर्जा दिलाया गया. ग्रामीण क्षेत्रों की जो भूमि नगर निगम का हिस्सा बनी है, उसका अधिकांश भाग आज भी खाली पड़ा हुआ है
. ऐसे भूभाग के मालिक के पास उतनी आर्थिक क्षमता नहीं है कि वह उस भूमि का व्यवसायिक उपयोग कर सकें. गौरतलब हो कि एक वर्ष पूर्व भी विभाग ने इस तरह का आदेश जारी किया था. उस समय स्थानीय स्तर पर हुए आंदोलन व विभिन्न कारणों से टैक्स वसूली का मामला ठंडा पड़ गया.
इस बीच विभाग के प्रधान सचिव ने चैतन्य प्रसाद ने पत्रांक 427, दिनांक 10.08.2016 के द्वारा नगर आयुक्त को निगम क्षेत्र के सभी स्तर के जमीनों से टैक्स वसूलने का अल्टीमेटम दिया है.
यह है विभागीय आदेश : नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद द्वारा 10 अगस्त 2016 को नगर आयुक्त को दिये आदेश में बिहार में नगर पालिका अधिनियम 2007 तथा इसके अंतर्गत बनाये गये नियमावली में वर्णित संपत्ति कर से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुये सम्पत्ति कर व रिक्त कर वसूलने का निर्देश दिया है. इस पत्र में प्रधान सचिव ने कहा है कि सम्पत्ति कर का नहीं लिया जाना, रिक्त भूमि कर नहीं लिया जाना व न्यूनतम 9 प्रतिशत से कम दर पर सम्पत्ति कर लिया जाना तथा सम्पत्ति कर वार्षिक किराया मूल्य के आधार ले लिया जाना अधिनियमों व नियमावली का उदाहरण है.
आदेश में बिहार नगर पालिका सशक्त स्थायी समिति कार्य संचालन नियमावली 2010 की धारा 10(4)(क) का उल्लेख करते हुये यह भी कहा है कि अधिनियम के प्रावधान व सरकार के दिशा निर्देश से हटकर पारित किये गये प्रस्ताव पर अगर क्रियान्वयन होता है तो इसके लिये सशक्त समिति के अध्यक्ष व सदस्य तथा मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी समान्य रूप से जिम्मेवार माने जायेंगे. साथ ही यही भी कहा है कि अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध या अनियमित प्रस्तावों को राज्य सरकार धारा 67 के अंतर्गत निरस्त कर सकती है अथवा लगातार चूक या शक्ति के दुरुपयोग,
अतिक्रमण की स्थिति में नगरपालिका को भंग करने के विकल्प पर भी विचार हो सकता है. इस तरह के आदेश से साफ समझा जा सकता है कि प्रधान सचिव ने एक तरह से नगर निगम प्रशासन को टैक्स वसूलने के लिए अल्टीमेटम दिया है.
सिटी प्लान के तह किया जायेगा विकसित
निगम क्षेत्र में जो भूमि आ गयी है. उस पर टैक्स देना ही चाहिए. आने वाले दिनों में खाली पड़े क्षेत्रों को भी सिटी प्लान के तहत विकसित किया जायेगा. सरकार का आदेश है, तो उसका अनुपालन होना चाहिए.
अजय कुमार ठाकुर, नगर निगम आयुक्त
न्यायोिचत नहीं है टैक्स लगाना
ग्रामीण परिवेश वाले जमीन में टैक्स लगाना न्यायोचित नहीं है. लोग टैक्स कहां से देंगे. शीघ्र ही एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री व विभाग के प्रधान सचिव से मिलकर अधिनियम में संशोधन कराने की मांग करेगा.
तारकिशोर प्रसाद, सदर विधायक
भूमाफिया व बिल्डर्स की हो जायेगी चांदी
राज्य सरकार के इस तुगलकी फरमान का फायदा आने वाले दिनों में भू-माफिया या विल्डर्स उठा सकते हैं. दरअसल नगर निगम क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि को शामिल किया गया है.
ऐसे जमीन का अधिकांश हिस्सा खाली पड़ा हुआ है. भू मालिक आर्थिक रूप से उतने सम्पन्न नहीं है कि वह उस भूमि का व्यवसायिक उपयोग कर सकें. अब इस आदेश के बाद टैक्स वसूलने के बादी भूस्वामी औने पौने दाम में उस जमीन को भू माफिया या विल्डर्स के हाथों बेचने को मजबूर हो जायेंगे. ऐसे भू स्वामियों के बीच इस आदेश के आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है.
उल्लेखनीय है कि कटिहार के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के कई भूमाफिया सक्रिय हैं. पहले से ही ऐसे भूमाफिया की कुदृष्टि खाली पड़े जमीन पर रहती है. अब यह आदेश आने के बाद भूमाफिया सक्रिय होने लगे हैं.
भूस्वामियों के बीच हड़कंप
विभागीय निर्देश व उसके आलोक में नगर निगम प्रशासन की भी बैठक के बाद नगर निगम क्षेत्र के भूस्वामियों के बीच हडकंप मच गया है. खासकर खाली पड़े जमीन के मालिकों के बीच हडकंप देखा जा रहा है. जब से यह आदेश सामने आया है तब से ऐसे लोगों के परिवारों में चर्चा जोर पकड़ ली है. खाली जमीन के कई मालिकों ने कहा कि मजबूरी में उन्हें जमीन बेचना पड़ सकता है.
