ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कटती है और लोग मजबूरन इनकी शरण में जाकर अपनी सेहत से खिलवाड़ करते हैं.
कटिहार : सूबे की सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधा को दुरूस्त करने के लाख दावे पेश करे लेकिन हकीकत यही है कि सूबे के विभिन्न जिलों के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आज भी लोगों को जुगाड़ तंत्र का ही सहारा लेना पड़ता है. तमाम रोक के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कटती है और लोग मजबूरन इन झोलाछाप की शरण में जाकर अपनी सेहत से खिलवाड़ करते हैं.
जिले में भी कमोबेश यही हालात हैं. सेमापुर अंतर्गत बरैटा, सिक्कट, सुजापुर, काबर, दुर्गापुर समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 30 हजार लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य उपकेंद्र सेमापुर में प्रतिदिन ओपीडी में 100 मरीजों की जांच की जाती है लेकिन मरीजों की इतनी बड़ी तादाद के सापेक्ष में यह भवन बेहद छोटा है. हालांकि इस संदर्भ में वहां मौजूद डॉ सुमित कुमार कहते हैं कि इस बारे प्रखंड के सीओ को जमीन उपलब्ध कराने की अपील भी की गयी है लेकिन अब तक कार्रवाई अमल में नहीं लायी गयी है.
नहीं हो सका भवन निर्माण
स्वास्थ्य उपकेंद्र के लिए विभाग द्वारा फंड भी जारी किये गये लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह फंड वापस लौट गया. इस बाबत डॉक्टर सुमित कुमार ने सीओ से भी जमीन उपलब्ध कराने संबंधी अपील की थी लेकिन अब तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है.
कहते हैं सीएस
इस संदर्भ में डॉ सीएस झा, सिविल सर्जन कहते हैं कि जिले में डॉक्टरों की कमी है. इस बाबत विभाग के आला अधिकारियों को सूचना दी गयी है. पद सृजित होते ही डॉक्टरों की बहाली कर दी जायेगी.
स्वास्थ्यकर्मियों की है भारी कमी
स्वास्थ्य उपकेंद्र में कर्मियों का टोटा है. जिस कारण यहां आने वाले मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ता है. बता दें कि यहां डॉक्टर के आवंटित पद दो हैं लेकिन एक डॉक्टर के सहारे यह स्वास्थ्य उपकेंद्र चलाया जा रहा है. 04 एएनएम की जगह 02 एएनएम से काम लिया जा रहा है.
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार एकमात्र मौजूद ए-ग्रेड कर्मी का भी तबादला मनिहारी हो जाने की संभावना है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से यहां मरीजों की जांच हो रही है. हालांकि एकमात्र मौजूद डॉक्टर प्रतिदिन अपनी सेवाएं दे रहे हैं और मरीजों ने भी उनके कार्य पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया. रही सही कसर यहां दवाईयों की अनुपलब्धता पूरी कर देती है. यहां विभाग द्वारा दवाईयां वाया बरारी भेजी जाती है. जिससे कभी कभार दवाई की कमी भी महसूस की जाती है.
