कटिहार : राज्य सरकार द्वारा पूर्ण शराबबंदी के फैसले का व्यापक असर दिखने लगा है. एक तरफ महिलाओं व शराब से दूर रहने वाले लोग राज्य के नीतीश सरकार के पूर्ण शराबबंदी के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ शराब पीने वाले लोगों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गयी है. शराब के बगैर नहीं रहने वाले सक्षम लोग शराब की उपलब्धता के लिए अलग-अलग रणनीति बनाने में जुट गये हैं. वहीं राज्य सरकार ने पूर्ण शराबबंदी का फैसला ऐसे समय में लिया है, जब कटिहार जिला सहित बिहार में पंचायत चुनाव पूरे शबाब पर है.
शराबबंदी को लेकर प्रशासन चौकस
कटिहार : राज्य सरकार द्वारा पूर्ण शराबबंदी के फैसले का व्यापक असर दिखने लगा है. एक तरफ महिलाओं व शराब से दूर रहने वाले लोग राज्य के नीतीश सरकार के पूर्ण शराबबंदी के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ शराब पीने वाले लोगों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गयी […]

प्रथम चरण के लिए पंचायत चुनाव का मतदान 28 अप्रैल को होना है. खासकर ब्रांडेड शराब पीने के शौकीन लोग अब विकल्प की तलाश में है. पूर्ण शराबबंदी के तहत मिलिट्री कैंटीन को अलग रखा गया है, तो वहीं कटिहार का सीमावर्ती इलाका यानी झारखंड, पश्चिम बंगाल व नेपाल से शराब मंगाने की रणनीति पर ऐसे लोग विचार कर रहे हैं. हालांकि नये उत्पाद नीति के तहत पूर्ण शराबबंदी को लेकर जारी अधिसूचना के अनुसार शराब के उत्पादन, भंडारण, सार्वजनिक स्थानों पर उपभोग आदि को प्रतिबंधित किया गया है. पकड़े जाने पर सजा व जुर्माने का भी प्रावधान है.
प्रशासन रख रहा है खुफिया नजर
पूर्ण शराबबंदी के बाद उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव केके पाठक ने पत्र के माध्यम से सभी डीएम, एसपी व उत्पाद अधीक्षक सहित विभिन्न विभागीय पदाधिकारियों को पूर्ण शराबबंदी को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है. सरकार के निर्देश के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी व पुलिस विभिन्न स्तरों से शराबबंदी को कारगर बनाने में जुटे हैं. शराब की आवाजाही सहित अवैध बिक्री व पंचायत चुनाव में शराब के उपयोग तथा सक्षम लोगों द्वारा शराब की आपूर्ति पर खुफिया नजर रख रहा है.