कटिहार से सूरज गुप्ता की रिपोर्ट:
डीएम की अध्यक्षता वाली समिति करेगी स्कूलों की निगरानी
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के आलोक में जिले के 16 प्रखंडों में चयनित किए गए मॉडल स्कूलों को अब धरातल पर उतारने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. शिक्षा विभाग के नए नियमों के अनुसार, इन मॉडल विद्यालयों के कुशल संचालन, बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है. इस नवनिर्मित समिति के अध्यक्ष खुद जिला पदाधिकारी (DM) होंगे, जबकि जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इनके अलावा कमेटी में उप विकास आयुक्त (DDC), बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के कार्यपालक अभियंता और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
सभी 16 प्रखंडों के इन स्कूलों को मिला है ‘मॉडल’ का दर्जा
जिले के जिन 16 स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर मॉडल स्कूल के रूप में संचालित किया जा रहा है, उनकी आधिकारिक सूची इस प्रकार है:
- आजमनगर: आरके उच्च विद्यालय, आजमनगर
- बलरामपुर: उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, कल्याणगांव
- बारसोई: हाई स्कूल, अबादपुर
- कदवा: हाई स्कूल, परभेली
- बरारी: एसजेएनसी हाई स्कूल, बरेटा (सेमापुर)
- डंडखोरा: उत्क्रमित उच्च विद्यालय, टिकैली
- फलका: शिव नारायण सर्वोदय हाई स्कूल, बरेटा
- हसनगंज: उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पदमपुर
- कटिहार: उच्च विद्यालय, हफलागंज
- कोढ़ा: उच्च विद्यालय, दिघरी
- कुरसेला: उत्क्रमित हाई स्कूल, कटारिया
- मनसाही: राजेंद्र उच्च विद्यालय, धनपारा
- प्राणपुर: उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बुद्धनगर
- समेली: उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, मल्हारिया
- अमदाबाद: उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोपालपुर
- मनिहारी: लहरू स्मारक प्लस टू स्कूल, नवाबगंज
ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को मिलेगा उच्च स्तरीय शिक्षा का लाभ
इस महत्वपूर्ण पहल के शुरू होने से कटिहार के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को अब अपने ही प्रखंड में निजी स्कूलों की तर्ज पर अत्याधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी. इन मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशाला (लैब) और बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है. जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति अब नियमित रूप से इन स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक स्तर की समीक्षा करेगी, ताकि बिना किसी बाधा के समय पर सत्र का संचालन शुरू किया जा सके.
