राणा सिंह, कटिहार : कदवा थाना के सोनैली में गुरुवार को कैश वैन से लूट के बाद शहर के व्यवसायियों को भी झनझोर कर रख दिया है. शहर के बीचोंबीच दर्जनों सरकारी व गैर सरकारी बैंक स्थित है. इसके बावजूद भी बैंक के बाहर न तो सुरक्षा गार्ड मौजूद रहते हैं और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था देखी जाती है.
कदवा में लूट कांड के बाद लोग बैंक की सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं. व्यवसाई वर्ग इस मामले को लेकर काफी चिंतित है. शहर के एमजी रोड, हरदयाल टॉकीज रोड, मिरचाईबाड़ी, शिव मंदिर चौक आदि जगहों पर दर्जनों बैंक स्थित है. लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ बैंकों को छोड़ सारे बैंकों मैं लचर व्यवस्था है. बैंकों में सुरक्षाकर्मी तो मौजूद है.
लेकिन ज्यादातर कई बैंको के सुरक्षाकर्मी अपनी सुरक्षा ड्यूटी को निभाने के साथ-साथ बैंक के भी कागजी कार्रवाई में अपनी भूमिका निभाते हैं. कई बैंकों में देखा जाता है कि फॉर्म लेने देने में सुरक्षा गार्ड के भरोसे ही यह कार्य चलता है. सवाल यह भी उठता है कि यदि सुरक्षाकर्मी सुरक्षा को छोड़ कर बैंकों के कार्य को करने में लग जायेंगे तो बैंक की सुरक्षा किसके भरोसे होगी.
रोजाना एटीएम में पैसे डालने के लिए केस भान के जरिए सुरक्षाकर्मी हर एटीएम पहुंचते हैं. लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं देखी जाती है. एटीएम में पैसा डालने के लिए चार से पांच की संख्या में भी सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं. जबकि दो सुरक्षाकर्मी को पैसे से भरा बैग लेकर एटीएम की ओर जाते दिख जाते हैं. अब दो सुरक्षाकर्मी के भरोसे ही पैसे की सुरक्षा रहती है. ऐसे में साफ अंदाजा लगाया जा सकता है की एटीएम ले जाने वाला पैसा सही मायने में कितना महफूज है.
शहर के व्यापारियों की मानें तो पुलिस प्रशासन की अनदेखी के कारण भी बड़ी लूट कांड की घटना शहर में भी घट सकती है. व्यापारियों की मानें तो जब एटीएम में पैसे डालने के लिए केश भान निकलती है तो उन्हें पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग मिलना चाहिए. अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचाने का भी दायित्व पेट्रोलिंग पार्टी का होना चाहिए. ऐसे में अपराधियों के अंदर पुलिस प्रशासन का खौफ बरकरार रहेगा और लूट कांड की घटना पर अंकुश लगेगा.
बैंक के अंदर लगते हैं स्पाई
शहर की घटना में बहुत बार देखा गया है कि बैंक के अंदर ही उचक्के द्वारा पैसे उड़ा लिये जाते हैं. मिरचाईबाड़ी एसबीआई बैंक में कई बार इस तरह की घटना को उच्चकों ने अंजाम दे दिया है. इसके बावजूद भी आज तक कुछ घटना को छोड़ उच्चकों का उद्भेदन करने में पुलिस नाकाम रही है.
बैंक के अंदर इस तरह की घटना को अंजाम देने से साफ यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बैंक की सुरक्षा किस तरह से हो रही है. व्यर्थ के भी कई लोग बैंक के अंदर घंटों बैठे रहते हैं. जिसे पूछने वाला कोई नहीं रहता है. ऐसे में कई आपराधिक किस्म के लोग बैंक के अंदर बैठकर ग्राहकों के ऊपर अपनी नजरें बनाए रखते हैं.
बैंक से पैसा निकालने आये खाता धारियों के पीछे भी बैंक के अंदर से ही स्पाई लग जाते हैं. कुछ तो बैंक के अंदर ही अपने काम को अंजाम दे देते हैं तो कई बैंक से निकलने के बाद बाहर घटना को अंजाम देते हैं. बैंक से पैसा लेकर निकलने के बाद सड़कों पर चल रहे लोगों के वाहनों के डिक्की से भी पैसे उड़ा लिए जाते हैं जो साफ दर्शाता है कि वह बैंक के अंदर से ही उनकी मुखबिरी हो रही थी. बैंक के अंदर बैठे अपराधियों का सरगना पूरी जांच-पड़ताल के बाद घटना को अंजाम देते हैं.
