कटिहार : जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीके मलिक ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के विगत 24 दिसंबर को 163 पशुओं को छोड़ने के आदेश को गैरकानूनी करार दे दिया और सभी छोड़े गये पशुओं को एक सप्ताह के अंदर गौशाला में जमा करने का आदेश दिया है. ज्ञात हो कि कदवा थाना अंतर्गत बड़ी संख्या में तस्करी के लिए पशुओं को ले जाने के मामले में न्यायिक दंडाधिकारी ने छोड़ने का आदेश दिया था.
इसके विरुद्ध गो ज्ञान फाउंडेशन एवं ध्यान फाऊंडेशन की ओर से याचिका दायर की गयी थी. इसमें कहा गया था कि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने उनके आवेदन पर विचार नहीं किया और बिना सुनवाई के ही तस्करी के लिए ले जा रहे सभी पशुओं को छोड़ने का आदेश दे दिया.
इसके बाद पशु तस्कर स्थानीय थानाध्यक्ष को मेल में लेकर सभी स्वस्थ पशुओं को बलपूर्वक गौशाला से लेकर चले गये और बूढ़े और लाचार पशुओं को छोड़ दिया. इस मामले में गो ज्ञान फाउंडेशन तथा ध्यान फाउंडेशन के आवेदन पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने स्वत : संज्ञान लेते हुए इस मामले में आपराधिक पुनरीक्षण वाद दायर किया था.
इसमें एमिकस क्यूरी के रूप में अधिवक्ता संघ के वरीय अधिवक्ता सुशील कुमार झा एवं पूर्व लोक अभियोजक शबरी अधिवक्ता बिंदेश्वरी प्रसाद सिंह ने मामले में पक्ष रखा था. बिहार के सबसे बड़े पशु तस्करी के लिए जब्त पशुओं में से एक यह बड़ा मामला है. इसमें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के स्तर से डेढ़ सौ से अधिक पशुओं को छोड़ दिया गया था.
यह आदेश सभी स्थानीय न्यायालयों को भी उपलब्ध कराया गया :जिला एवं सत्र न्यायाधीश का यह आदेश सभी स्थानीय न्यायालयों को भी उपलब्ध कराया गया है. अधिवक्ता संघ समेत जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को भी यह आदेश उपलब्ध कराया गया है. सभी पशुओं को न्यायालय ने वैसी ही स्थिति में गौशाला में जमा करने का आदेश दिया है, जिस स्थिति में वह सभी पशुओं को ले गये थे.
बहस में उच्च न्यायालय के प्रशांत किशोर, दिल्ली उच्च न्यायालय की श्रेया अग्रवाल समेत विजय कुमार गुप्ता एवं अन्य ने भाग लिया. इस मौके पर अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह समेत कई लोग उपस्थित थे.
