शहर की सड़कों में कोई सुधार नहीं हो रहा है जिससे लोग परेशान हैं
कटिहार : भले ही केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक सहित राज्य के वरीय अधिकारी व जिला स्तर के अधिकारी शहर में समय-समय पर आते-जाते रहे हो तथा विभिन्न गतिविधियों में शामिल भी होते रहे हों. पर शहर की सड़कों पर कोई सुधार नहीं हो रहा है. एक दो सड़क को छोड़ दें तो ज्यादातर शहर की सड़कों की गिट्टी उखड़ने लगी है. कई सड़क तो हमेशा जलजमाव से जूझता है.
दूसरी तरफ शहर से सटे मोहल्लों के सड़कों की स्थिति और भी बदतर है. जबकि नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार शहर को चमकाने के बाद समय-समय पर करते रहे हैं. उसके बावजूद कटिहार शहर की स्थिति सड़कों के मामले में खुद सब कुछ बयां कर रही है.
अभी हाल ही में केंद्र सरकार के एक सर्वेक्षण के आधार पर स्वच्छता के मामले में कटिहार शहर को बिहार का नंबर वन मन है. हालांकि यह बात शहरवासियों के गले नहीं उतर रही है. दूसरी तरफ शहर में कई ऐसे सड़क है जो जल जमाव के साथ साथ जर्जरता का दंश झेल रहा है. ऐसा नहीं है कि नगर निगम प्रशासन के पास बजट नहीं है. हर साल नगर निगम बजट तैयार करती है. यह बजट करोड़ों का होता है.
जिसमें सड़कों के जीर्णोद्धार और उसे चमकाने की योजना भी रहती है. केंद्र व राज्य सरकार भी शहर को साफ सुथरा और चमकाने के उद्देश्य अच्छी खासी राशि नगर निगम को मुहैया कराती है. उसके बावजूद इस स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रही है. फलस्वरुप शहरवासी के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों से शहर आने वाले लोगों को भी जर्जर व जल जमाव वाले सड़कों से गुजरना पड़ता है.
केस-टू- न्यू मार्केट रोड चलने लायक नहीं
शहर के बाटा चौक से दुर्गास्थान चौक तक जाने वाली सड़क को डॉ राजेंद्र प्रसाद पथ कहा जाता है. आमतौर पर इसे न्यू मार्केट रोड व हरदयाल रोड भी कहते है.
इस रोड की स्थिति काफी बदतर है. खासकर न्यू मार्केट मंडी से लेकर पुराना बाटा चौक तक सड़क पर जलजमाव हमेशा रहता है. सड़क करीब-करीब गड्ढे में तब्दील हो चुका है. अभी हाल ही में यहां पर भी ईद का टुकड़ा डाल कर किसी तरह खानापूर्ति की गयी. आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. हालांकि इस रोड पर ही सब्जी की दुकान सजी रहती है.
वाहनों की आवाजाही में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बीच सड़क पर वाहनों को भी खड़ी कर दिया जाता है. साफ-सफाई की तो बात ही अलग है. कचरा का अंबार लगा रहता है. दूसरी तरफ इसी सड़क से एक सड़क दुर्गा स्थान चौक से पहले अनाथालय रोड की ओर चले जाती है. अनाथालय रोड की स्थिति भी काफी दयनीय है. जर्जर अवस्था में होने की वजह से इस रोड तक दम निकल जाता है.
बानगी के तौर पर देखे तो शहर के राम रहीम चौक से गांधीनगर सट हुए बेगना नहर तक सड़क जाती है. यह सड़क पूरी तरह जर्जर है. खासकर गांधीनगर के पास से बेगना तक तो सड़क गड्ढे में तब्दील हो चुकी है. छठ पूजा के पहले ईंट बड़े बड़े के टुकड़ों को बिछा दिया था.
वाहनों के अलावा आमलोग भी उस समय दुर्गा स्थान होकर आने जाने लगे थे. छठ पूजा के समय बिछाये गये ईंट के टुकड़ों पर मिट्टी डाल दिया गया. पर आज तक उस पर रोलर नहीं चलाया गया. लोग हिचकोले खाते हुए यहां से गुजरते है. यही स्थिति कमोवेश हरिगंज चौक, कोरिया टोली होते हुए रामपारा जाने वाली सड़क की है.
इस सड़क में भी कई स्थानों पर गड्ढे हो चुके हैं. आगे जाने पर जलजमाव से सामना होगा. साल में करीब छह महीने से अधिक समय यहां जलजमाव रहता है. फलस्वरूप लोग दूसरा रोड पकड़ कर लंबी दूरी तय कर शहर में प्रवेश करते है स्थानीय शहरवासियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. उल्लेखनीय है कि उक्त दोनों सड़क में से पहली सड़क बारसोई, कदवा, डंडखोरा प्रखंड के लोगों के लिए आने जाने का एक सड़क है. जबकि दूसरा सड़क से कटिहार ग्रामीण इलाके के लोग शहर आते जाते है.
नगर निगम कार्यालय के कुछ दूरी पर अमला टोला की एक सड़क है. न्यू मार्केट रोड से इस सड़क का लिंक है. जबकि दूसरी तरफ यह रोड में एमजी रोड जाकर मिलती है. न्यू मार्केट से सटे इस सड़क की स्थिति काफी दयनीय है.
यहां हमेशा ही जल जमाव की स्थिति बनी हुई रहती है. इसी तरह पुराना बाटा चौक के पास की सड़क की स्थिति भी काफी जर्जर है. यहां के बारे में बताया जाता है कि रेलवे ने अपने क्षेत्र अंतर्गत सड़क को चकाचक कर दिया है और नगर निगम के दायरे में आने वाले सड़क की स्थिति बदतर है. इसी तरह शहर के कई अन्य सड़कों की स्थिति भी काफी देनी है.
बाटा चौक से रेलवे स्टेशन तक जाने वाली सड़क जर्जर स्थिति में है. हल्की बूंदाबांदी में भी यह सड़क कीचड़ में हो जाता है. पैदल चलने वालों काफी परेशानी उठानी पड़ती है. जबकि कटिहार जंक्शन जाने के लिए यह मुख्य पथ माना जाता है.
