बनारस के तर्ज पर विकसित किया जा सकता है कटिहार गंगातट

मोस्ट बैकवर्ड जिले में शामिल है कटिहार कटिहार : जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नये साल को लेकर लोगों में तरह-तरह की उम्मीदें बनी हुई है. पिछले वर्ष में जो काम नहीं हो सका है, वह अब नये साल में होगा, ऐसी उम्मीद लोगों को बनी हुई है. यूं तो सरकार की योजनाओं […]

मोस्ट बैकवर्ड जिले में शामिल है कटिहार

कटिहार : जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नये साल को लेकर लोगों में तरह-तरह की उम्मीदें बनी हुई है. पिछले वर्ष में जो काम नहीं हो सका है, वह अब नये साल में होगा, ऐसी उम्मीद लोगों को बनी हुई है. यूं तो सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के आधार पर विकास के नये-नये काम होने है, पर कुछ ऐसे भी काम हैं, जिनको लेकर विशेष योजना बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है. नीति आयोग द्वारा कटिहार जिले को मोस्ट बैकवर्ड जिले में शामिल किया गया है.
ऐसे में पिछले दिनों नीति आयोग द्वारा तैनात वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अतुल कुमार तिवारी ने कटिहार आकर जिले में चल रही विकास योजनाओं का जायजा लिया. साथ ही विकास को लेकर विभिन्न तरह की संभावनाओं पर भी विचार किया, ऐसे में कटिहार के लिए यह एक बड़ा अवसर है. देश के विकास के मेनस्ट्रीम में इन जिलों को शामिल करने के लिए विशेष योजना बनायी जाये.
नये साल की शुरुआत हो चुकी है. कटिहार गंगा, कोसी व महानंदा जैसी नदियों के बीच बसा हुआ है. हालांकि इसका खामियाजा भी बाढ़ व कटाव के रूप में हर वर्ष कटिहारवासियों को भुगतना पड़ता है. इन नदियों के जिले में रहने की वजह से इसका सांस्कृतिक महत्व बढ़ जाता है. पिछले दिनों हुई बैठक में यह बात सामने आयी थी कि कटिहार को लेकर विशेष योजना बनायी जानी चाहिए. ऐसे में यह एक अवसर भी है कि नदियों को केंद्र में रखकर अगर योजना बनायी जाती है, तो कटिहार देश के अन्य विकसित जिले में शुमार हो सकता है.
मसलन बनारस के तर्ज पर कटिहार का विकास किया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि मनिहारी का गंगा तट, काढ़ागोला की गंगा, कुरसेला के समीप गंगा-कोसी संगम व महानंदा नदी को केंद्र में रखकर विकास का रोडमैप तैयार किया जाये. इसके लिए जरूरी है कि प्रशासनिक महकमे के साथ-साथ राजनीतिक दल के नेताओं, जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी समन्वय बनाकर सामूहिक पहल हो, तभी आने वाले वर्षों में जमीन पर कुछ दिखेगा. प्रभात खबर उम्मीद 2018 के तहत कटिहार में विकास की संभावनाओं पर आम व खास का ध्यान खींचने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है.
नदियों पर आधारित बने विकास योजना
यह सर्वविदित है कि कटिहार जिला नदियों से घिरे रहने की वजह से हर साल बाढ़ से जूझता है. ऐसे में बाढ़ की विभीषिका की वजह से यहां की विकास का कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाता है. ऐसे में जरूरी है कि नदियों को केंद्र में रखकर या उस पर आधारित विकास की योजना बनायी जानी चाहिए. जिस तरह गंगा, कोसी व महानंदा नदी तथा उसकी सहायक नदियां कटिहार से होकर गुजरती है. ऐसे में नदियों पर आधारित विकास योजना के क्रियांवयन होने से आम लोगों को इसका फायदा मिलेगा.
साथ ही कटिहार की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी. कटिहार जिला मोस्ट बैकवर्ड जिला में शामिल होने की वजह से यह एक अच्छा अवसर है कि नदियों पर आधारित कार्य योजना बनायी जाय. जिससे रोजगार के अवसर भी खुले. पर्यटन के रूप में भी विकसित हो सकें. नदियों को केंद्र में रखकर अगर विकास का रोडमैप बनता है तो इसका दूरगामी में फायदा भी कटिहार जिला को मिलेगा. कई विशेषज्ञों ने यह बात साबित भी किया है कि अब बाढ़ नियंत्रण की जगह बाढ़ प्रबंधन पर काम किया जाना जरूरी है. ऐसे में विशेषज्ञों की टीम बनाकर नदियों पर आधारित कार्य योजना बनायी जा सकती है.
पर्यटन की है भरपूर संभावना, प्रयास की जरूरत
नदियों से घिरे कटिहार शहर को अगर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये, तो विकास के मामले में कटिहार काफी आगे बढ़ सकेगा. मनिहारी गंगा तट पर हर वर्ष लाखों की तादाद में श्रद्धालु कटिहार जिले के कोने-कोने से पहुंचते हैं. यहां के अलावा अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पश्चिम बंगाल व नेपाल से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए मनिहारी पहुंचते हैं. सावन के महीने में तो यहां मेले जैसा नजारा होता है. जिस तादाद में लोग मनिहारी के गंगातट पहुंचते हैं,
उसके अनुरूप सुविधा का घोर अभाव है. अगर मनिहारी गंगा तट पर बनारस के अनुरूप सीढ़ीनुमा प्लेटफाॅर्म बना दिया जाये, तो इसका फायदा काफी होगा. मनिहारी के गंगा तट को देखते हुए उसे बनारस के तर्ज पर विकसित किया जा सकता है. साथ ही समय समय पर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधि होने से यह क्षेत्र विकास की श्रेणी में आ जायेगा. इसके लिए जरूरी है कि एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाये.
यह सर्वविदित है कि मनिहारी- साहेबगंज के बीच गंगा नदी पर पुल निर्माण व फोरलेन सड़क की आधारशिला रखी जा चुकी है. आने वाले वर्षों में पुल बनने व फोरलेन सड़क निर्माण हो जाने से इस क्षेत्र का कायाकल्प भी हो जायेगा. ऐसे में अगर मनिहारी के गंगा तट को केंद्र में रखकर पर्यटन के रूप में विकसित करने का रोडमैप बनता है तो इसका फायदा मनिहारी के साथ-साथ कटिहार को भी मिलेगा.
गंगा-कोसी संगम को भी किया जा सकता है विकसित
कुरसेला का गंगा-कोसी संगम को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. कुरसेला के पास ही गंगा व कोसी नदी का पानी एक स्थान पर आकर मिल जाता है. आध्यात्मिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इस स्थान का काफी महत्व है. कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान इसी स्थल से शुरू होती रही है. ऐसे में अगर पर्यटन स्थल के रूप में इसे विकसित किया जायेगा तो कुरसेला के साथ साथ कटिहार व सीमांकल का विकास होगा. उल्लेखनीय है कि जब वर्ष 2008 में बाढ़ आयी थी तो कोसी मधेपुरा से एक यात्रा कुरसेला के गंगा कोसी संगम पर आकर समाप्त हुई थी. मैग्सेसे पुरस्कार विजेताओं व जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने इसी गंगा कोसी के संगम में आकर उस यात्रा का समापन किया था. ऐसे में कई महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र यह संगम रहा है. इसलिए जरूरी है कि इस क्षेत्र को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए कार्य योजना बनायी जानी चाहिए इसी के समीप ऐतिहासिक गांधी घर भी है.

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