कटिहार-बारसोई रेलखंड पर यात्रा करना किसी सजा से कम नहीं

कटिहार : कटिहार-बारसोई रेलखंड पर इन दिनों यात्रा करना किसी सजा से कम नहीं है. इस रूट पर चार जोड़ी ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है. जबकि इस रेलखंड में लगभग 25 लाख की आबादी का एक मात्र साधन इन दिनों रेलमार्ग है. इसके बावजूद भी समय का कोई निर्धारण ट्रेन खुलने आगमन एवं […]

कटिहार : कटिहार-बारसोई रेलखंड पर इन दिनों यात्रा करना किसी सजा से कम नहीं है. इस रूट पर चार जोड़ी ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है. जबकि इस रेलखंड में लगभग 25 लाख की आबादी का एक मात्र साधन इन दिनों रेलमार्ग है. इसके बावजूद भी समय का कोई निर्धारण ट्रेन खुलने आगमन एवं प्रस्थान का निर्धारण नहीं किये जाने से रेल यात्रियों को पांच से छह घंटा प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ता है. मजे की बात यह है की ट्रेन आगमन और प्रस्थान का समय की सटीक जानकारी स्टेशन प्रबंधक को भी नहीं रहती है.
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रहने के कारण रेलगाड़ी का परिचालन एवं रफ्तार का समय सीमा का कोई निर्धारण नहीं किया गया है. दिन में सुबह दो गाड़ी कटिहार से बारसोई के लिए प्रस्थान करती है. उसके बाद संध्या में एक गाड़ी का प्रस्थान किया जाता है. जिसके कारण या प्लेटफाॅर्म पर यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. उस अनुसार ट्रेन की संख्या काफी कम रहने से ट्रेन में काफी भीड़ बढ़ जाती है. बारसोई की ओर से दो जोड़ी ट्रेन कटिहार चलायी गयी है. जिसके कारण ट्रेन में यात्रियों की काफी भीड़ बढ़ गयी है. ट्रेनों में भेड़ बकरी की तरह यात्रियों को ठूंस कर यात्रा कराया जा रहा है. जिसके कारण महिलाओं, बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
ट्रेन में भीड़ बढ़ जाने के कारण ट्रेन की रफ्तार काफी धीमा हो जाने के कारण 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में तीन घंटा से अधिक समय लग जाता है. पिछले दिनों बाढ़ के कारण कई जगह रेल पटरी एवं रेलवे ब्रिज पर क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण रेल परिचालन पर व्याप्क असर पड़ा है. ट्रेन में इतनी भीड़ हो रही है कि जगह नहीं रहने के कारण महिला यात्रियों को खड़े-खड़े यात्रा करनी पड़ती है.

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