उपेक्षा : दूसरों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाला प्रशासन अपने ही दफ्तर में फेल # प्रमुख के कार्यालय में लगाया गया है सबमर्सिबल, अक्सर रहता है बंद # कार्यालय अवधि में दूसरे विभागों के टायलेट या होटलों का सहारा लेने को मजबूर महिलाएं # राशि के अभाव में लंबे समय से अर्ध निर्मित पड़ा है मनरेगा भवन # प्रभात खास # मोहनिया सदर. प्रखंड मुख्यालय परिसर में अवस्थित ट्राइसेन भवन में लंबे समय से संचालित मनरेगा कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मियों को टायलेट में पानी की कमी का दंश झेलना पड़ रहा है. यहां कार्यालय अवधि में जरूरत महसूस होने पर दूसरे विभागों के कार्यालयों में बने टायलेट या फिर होटलों में बने टायलेट का सहारा लेना उनकी विवशता हो जाती है. लेकिन, फिर भी लोगों को शौचालय का निर्माण कराने, व्यवहार परिवर्तन कर खुले में शौच नहीं करने, महिलाओं के सम्मान के लिए घरों में टायलेट बनवाने के साथ उसका उपयोग करने की नसीहत देने वाले उन प्रशासनिक अधिकारियों को अपने ही महिला कर्मियों की यह गंभीर समस्या नजर नहीं आ रही है. उनकी ही महिला कर्मी टायलेट में पानी की कमी का दंश झेल रही है, इसे पानी की कमी की जगह प्रशासनिक उपेक्षा कहा जाये तो शायद कोई गलती नहीं होगी. महिलाओं के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रशासन के नाक के नीचे उनकी ही महिला कर्मी उपेक्षित महसूस कर रही हैं. कार्यालय अवधि में टायलेट महसूस होने पर सबसे अधिक परेशानियों का सामना मनरेगा कार्यालय में पदस्थापित चार महिला कर्मियों को करना पड़ रहा है. पुरुष कर्मी तो बाहर खुले में चले जाते है, लेकिन महिला कर्मियों जरूरत पड़ने पर भारी संकट का सामना करना पड़ता है, जहां मुख्यालय परिसर में हमेशा लोगों का आना जाना लगा रहता है. # प्रमुख के कार्यालय में लगा है सबमर्सिबल ट्राइसेन भवन के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित प्रमुख के कार्यालय कक्ष में सबमर्सिबल व स्टार्टर लगाया गया है, जबकि प्रमुख का कार्यालय प्रायः बंद ही रहता है, जिससे सबमर्सिबल को चालू नहीं किया जा सकता. इसका नतीजा है कि उक्त भवन में सभी को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है. ट्राइसेन भवन में ग्राउंड फ्लोर पर ही चुनाव से संबंधित कार्य किया जाता है, उक्त भवन में कार्य करने वाले सभी लोगों को पीने के लिए पानी बाहर से मंगवा कर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है. पानी खरीद कर प्यास तो मनरेगा कर्मी बुझा लेते हैं, लेकिन टायलेट में पानी की कमी को कैसे दूर करें, इनके लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बनी है. ट्राइसेन भवन से चंद दूरी पर लंबे समय से मनरेगा कार्यालय का अपना भवन बन रहा है जो राशि के अभाव में आज भी अर्धनिर्मित पड़ा है और अपनी उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है, यदि यह भवन समय से बनकर तैयार हो गया होता जो इन मनरेगा कर्मियों को टायलेट में पानी की कमी सहित अन्य असुविधाओं का सामना शायद नहीं करना पड़ता और न ही किसी अन्य पर निर्भर होना पड़ता. # क्या कहते हैं मनरेगा पीओ इस संबंध में पूछे जाने पर मनरेगा पीओ प्रमोद कुमार ने कहा कि प्रमुख कार्यालय में सबमर्सिबल लगा हुआ है, लेकिन कार्यालय अक्सर बंद रहता है, जिससे सबमर्सिबल चालू नहीं किया जा सकता. प्रमुख का कार्यालय बंद रहने से मनरेगा कार्यालय के टायलेट में पानी नहीं रहता है, इससे महिला कर्मियों को बहुत असुविधा होती है. पीने के लिए पानी तो खरीद कर मंगवा लिया जाता है. हम भी इस समस्या से परेशान है, अच्छा नहीं लगता है कि हमारी महिला कर्मी टायलेट के लिए बाहर का सहारा ले, लेकिन मजबूरी है. # क्या कहते हैं प्रमुख प्रतिनिधि इस संबंध में पूछे जाने पर प्रमुख पुनीता देवी के प्रतिनिधि सह पति राजेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि सबमर्सिबल खराब हो गया है, वह पानी नहीं दे रहा है. दूसरी बोरिंग करवायी जायेगी.
मनरेगा कार्यालय के टायलेट में पानी नहीं रहने से महिला कर्मियों की हो रही फजीहत
दूसरों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाला प्रशासन अपने ही दफ्तर में फेल
