खेतों में खड़ी फसल को रौंदकर व खाकर बर्बाद कर रहे जंगली जानवर, किसान बेहाल

दुर्गावती प्रखंड की छांव व खामीदौरा पंचायत के बधार में नीलगायों का तांडव

दुर्गावती प्रखंड की छांव व खामीदौरा पंचायत के बधार में नीलगायों का तांडव फसलों को पहुंचा रहे भारी क्षति, खून-पसीने की कमाई पर फिरा पानी महंगाई की मार के बीच दोहरी मुसीबत, शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे अन्नदाता दुर्गावती. स्थानीय प्रखंड क्षेत्र की छांव व खामीदौरा पंचायत के खरखोली व खामीदौरा गांव बधार में लगी गेहूं, चना, मसूर, सरसों आदि की खड़ी फसलों को नीलगाय जैसे जंगली जानवर रौंदकर या खाकर बर्बाद कर रहे हैं. खरखोली मौजा में खरखोली गांव के अलावा खामीदौरा, धनिहारी व धनेछा गांव के किसानों की खेती होती है. इस मौजे से सटे खामीदौरा पंचायत का खामीदौरा तथा छांव पंचायत के भदैनी, रूईया व भेरिया तथा खड़सरा पंचायत के धनेछा मौजे में भी खेती होती है. इन जंगली जानवरों के इस आतंक से किसान मुश्किल में पड़ गये हैं. अपनी मेहनत व लागत बर्बाद होने से किसान इन दिनों काफी चिंतित हैं. घड़रोज हर दिन उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में एक तो खेती मुश्किल हो गयी है, सिंचाई, खाद व बीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में नीलगाय जैसे जंगली जानवर खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों आदि चैती फसलों को नष्ट कर दे रहे हैं, जिससे उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है. गौरतलब है कि इन दिनों लगभग 50 की संख्या में ये जानवर दिन के समय भी खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहे हैं. खामीदौरा के सुरेंद्र सिंह, धनिहारी के रामदुलार यादव, खरखोली के टेलु बिंद, द्वारिका बिंद, मुन्ना बिंद, धनेछा गांव के सुधीर कुमार सिंह व भेरिया के धनंजय सिंह आदि किसानों ने इस समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे जानवर लगातार फसलों को भारी क्षति पहुंचा रहे हैं. किसानों ने क्षेत्रीय शासन-प्रशासन व पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है. क्या कहते हैं किसान — मेरी खेती खरखोली व खामीदौरा गांव के पश्चिमी तरफ ताल सिवान वाले बधार में होती है. कड़ी मेहनत कर हमलोग खेती करते हैं. एक तो धान की फसल अंतिम समय में बारिश से मार खा गयी, अब खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं. शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. सुरेंद्र सिंह, खामीदौरा –खरखोली गांव के ताल सिवान में मेरी भी खेती होती है. खेतों में लगी गेहूं आदि चैती फसलों को ऐसे जानवर रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं. इन जानवरों से फसलों को कैसे बचायें, अब पैदावार भगवान भरोसे ही दिखती है. राम दुलार यादव, धनिहारी –दिन हो या रात, ये जंगली जानवर खेतों में कब किधर से आ जायें, बता पाना मुश्किल हो गया है. ये फसलों को इस कदर नष्ट कर दे रहे हैं कि कलेजा बैठ जा रहा है. जनप्रतिनिधियों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है. टेलु बिंद, खरखोली क्या कहते हैं मुखिया इस संबंध में पूछे जाने पर छांव पंचायत मुखिया प्रतिनिधि गजानंद यादव कहते हैं कि ऐसी बात है तो किसान पंचायत के नाम से आवेदन दें, ताकि किसानों की इन समस्याओं से निजात पाने के लिए जिला मुख्यालय आवेदन पत्र भेजकर अवगत कराया जा सके.

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Published by: Vikash kumar

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