कैमूर के चैनपुर थाने में पदस्थापित दो एएसआई को आर्केस्ट्रा में बार बाला को रुपये देने और हत्या एवं आर्म्स एक्ट के आरोपी के साथ बैठने के मामले में निलंबित कर दिया गया है. पुलिस की छवि धूमिल करने और पुलिस पदाधिकारी के आचरण के विपरीत गतिविधि में शामिल होने के आरोप में एसएसआई सत्येंद्र कुमार और एएसआई चंदन कुमार पर यह कार्रवाई की गयी है. शिकायत के साथ उपलब्ध कराये गये वायरल वीडियो की जांच में मामला सही पाए जाने के बाद कैमूर एसपी शिखर चौधरी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
शादी समारोह में आर्केस्ट्रा के दौरान रुपये देते दिखे पुलिस पदाधिकारी
मामला चैनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में आयोजित शादी समारोह का है. शिकायतकर्ता ने गोपनीय रूप से एसपी को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि दोनों पुलिस पदाधिकारी हत्या एवं आर्म्स एक्ट के आरोपी अजीत यादव के साथ बैठकर आर्केस्ट्रा देख रहे थे. शिकायत के साथ एक वीडियो भी उपलब्ध कराया गया था, जिसमें पुलिस पदाधिकारी सत्येंद्र कुमार को बार बाला को रुपये देते हुए देखा गया.
वायरल वीडियो में आरोपी के साथ बैठे दिखे दोनों ASI
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने इसकी जांच भभुआ एसडीपीओ ओम प्रकाश को सौंपी. जांच के दौरान शिकायत में लगाये गये आरोप सही पाए गये. वीडियो में सत्येंद्र कुमार को स्टेज पर बार बाला को रुपये देते हुए देखा गया. वहीं, दोनों पुलिस पदाधिकारी सादे लिबास में आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में बैठे नजर आ रहे हैं. उनके पास ही हत्या एवं आर्म्स एक्ट का आरोपी अजीत यादव भी बैठा दिखाई दे रहा है.
पुलिस आचरण पर उठे सवाल, विभागीय कार्रवाई भी शुरू
अपने ही थाना क्षेत्र में सादे लिबास में इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होना और हत्या के आरोपी के साथ बैठना पुलिस पदाधिकारी के आचरण को लेकर सवाल खड़े करता है. जांच के बाद पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों एएसआई को निलंबित कर दिया. दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गयी है.
दो साल पुराना है वायरल वीडियो
कैमूर एसपी शिखर चौधरी ने बताया कि जांच के दौरान यह बात सामने आयी कि वायरल वीडियो करीब दो साल पुराना है. एक व्यक्ति ने वीडियो के साथ शिकायत की थी, जिसके बाद भभुआ एसडीपीओ से पूरे मामले की जांच करायी गयी. जांच में शिकायत सही पायी गयी.
एसपी ने कहा कि वीडियो में दोनों पुलिस पदाधिकारी हत्या के आरोपी के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं. इससे आरोपी के साथ उनकी मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. साथ ही, वीडियो में पुलिस पदाधिकारी का आचरण भी पुलिस विभाग की छवि के अनुरूप नहीं पाया गया. इसी आधार पर दोनों को निलंबित किया गया है.
