भभुआ सदर. हिंदू धर्म में दीपावली के बाद होली का त्योहार सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है. रंगों के त्योहार होली में लोग एक दूसरे को रंग, अबीर, गुलाल लगाते हैं और बधाई व शुभकामनाएं देते हैं. होली के पर्व को लेकर ज्योतिषविद पंडित हरीशंकर तिवारी ने बताया कि इस साल 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को होली खेली जायेगी. वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 13 मार्च सुबह 10 बजकर 35 मिनट शुरू होगी और 14 मार्च दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के कारण होली 14 मार्च को है, जबकि होलिका दहन 13 मार्च को देर रात होगा. पूजा पाठ करने वाले होली 15 मार्च को मनायेंगे. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 26 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. बताया कि पूर्णिमा के साथ 13 मार्च की सुबह 10.03 बजे से भद्रा भी लग जायेगा, जो रात 10.37 बजे तक रहेगा. क्योंकि भद्रा में होलिका दहन वर्जित है. इसलिए ऐसे में भद्रा के समाप्त होने के बाद रात 10.38 बजे से होलिका दहन किया जा सकेगा. इसके अलावा 14 मार्च यानी होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा. यह ग्रहण सुबह 09 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. हालांकि, होली के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं रहेगा. जिले भर में होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी जाती हैं. कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है, फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए, क्योंकि धार्मिक दृष्टि से भी पेड़ों पर किसी न किसी देवता का आधिपत्य होता है. इधर, शहर में होलिका दहन के लिए लकड़ी आदि को इकट्ठा कर लोग अभी से तैयारी शुरू कर दिये है. = 10 मार्च को रंगभरी एकादशी इधर, होली से पूर्व 10 मार्च को रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जायेगा. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव व विष्णु पर रंग-गुलाल चढ़ा जीवन में खुशहाली की कामना मांगेंगे. ऐसी मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन सहस्त्रानाम पाठ के साथ शिवलिंग पर गुलाल और भगवान विष्णु पर तुलसी व गुलाल चढ़ाने से विशेष फल मिलता है, साथ ही भगवान का इस दिन विशेष शृंगार किया जाता है. इनसेट होली के रंग में रंगने की होने लगी तैयारी होली में मात्र सात दिन शेष, बाजार में नजर आने लगी रौनक भभुआ सदर. जिले सहित ग्रामीण अंचल के गांवों में होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. कैमूर जिले में भी होली की तैयारी शुरू हो गयी हैं. गौरतलब है कि इस बार होलिका दहन 13 मार्च और होली का पर्व अगले दिन 14 मार्च को मनाया जायेगा. ऐसे में शहर व ग्रामीण अंचल के गांव में तैयारी अभी से शुरू हो गयी है. होली में रंगों का विशेष महत्व होता है और होली गिले शिकवे भुलाकर आपसी भाईचारे का संदेश भी देती है. बाजार में भी होली के नजदीक होने के चलते रौनक नजर आने लगी है. खासतौर पर रेडीमेड कपड़ों का बाजार लगन के बाद एक बार फिर से अपने रंग में लौटने लगा है. सदर अस्पताल में सामान्य रोग के चिकित्सक डॉ विनय कुमार तिवारी का कहना है कि मौसम में अभी भी परिवर्तन का दौर जारी है. सुबह-शाम गुलाबी ठंड का असर बना हुआ है. ऐसे में पानी के रंग का स्वस्थ शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. बेहतर होगा कि लोग सूखे रंगों का ही प्रयोग करें, उसमें भी हरा रंग का प्रयोग करने से बचें. = पुलिस प्रशासन की ओर से रहेगा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम होली महापर्व को लेकर इस बार पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से भी माहौल न बिगड़े इसके लिए पुख्ता इंतजाम किये जा रहे है. जिले के पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला ने इस बार असामाजिक तत्वों द्वारा होली की फिजा खराब न कर दे इसके लिए पुलिस प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का निर्देश दिया है. बेहतर संचार व्यवस्था के जरिये प्रत्येक सूचनाओं को दस मिनट में कवर करने की रणनीति बनी है. इसके लिए पुलिस की दर्जनों टीमें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण करती रहेंगी. गौरतलब है, जारी रमजान के महीने में होली के पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखना चाहती है. सुरक्षा के लिए सभी थाना प्रभारियों को शांति व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश दिये गये हैं. वहीं, जिले के विभिन्न थानों के प्रमुख चौक चौराहों पर पुलिस कर्मियों की तैनाती अभी से कर दी गयी हैं. पुलिस जवानों की ओर से अतिरिक्त गश्त की भी व्यवस्था रहेगी और असामाजिक तत्वों, मनचलों व हुड़दंगियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जायेगी.
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